'दादी की शादी' रिव्यू: नीतू कपूर और कपिल शर्मा की भावुक कहानी दिल को छू जाएगी

नीतू कपूर और कपिल शर्मा स्टारर ‘दादी की शादी’ एक भावनात्मक पारिवारिक फिल्म है, जो बुजुर्गों के अकेलेपन, रिश्तों और दूसरी पारी की जरूरत को बेहद संवेदनशील अंदाज में पेश करती है. फिल्म में हास्य, भावनाएं और पारिवारिक ड्रामा का संतुलित मिश्रण देखने को मिलता है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

'दादी की शादी' रिव्यू: बॉलीवुड में पारिवारिक रिश्तों और भावनाओं पर आधारित फिल्में हमेशा दर्शकों के दिल के करीब रही हैं. इसी कड़ी में निर्देशक आशीष आर मोहन की फिल्म 'दादी की शादी' एक ऐसी कहानी लेकर आई है, जो बुजुर्गों के अकेलेपन, उनकी भावनाओं और दूसरी पारी की जरूरत को बेहद संवेदनशील तरीके से बड़े पर्दे पर पेश करती है.

8 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हुई यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज के उस पहलू को भी सामने लाती है, जिस पर अक्सर खुलकर बात नहीं होती. फिल्म की खास बात कपूर परिवार की तीन पीढ़ियों का एक साथ स्क्रीन पर नजर आना और रिद्धिमा कपूर साहनी का अभिनय पदार्पण भी है.

दादी की शादी: कहानी

फिल्म की कहानी हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत शहर शिमला से शुरू होती है, जहां विमला आहूजा (नीतू कपूर) अपने बड़े बंगले में अकेली जिंदगी बिता रही हैं. कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है, जब विमला सोशल मीडिया पर दोबारा शादी करने का ऐलान कर देती हैं.

उनका यह फैसला परिवार के लिए किसी झटके से कम नहीं होता. बेटे जीवन (दीपक दत्ता), नागेंद्र (जितेंद्र हुड्डा) और बेटी सुनैना (रिद्धिमा कपूर साहनी) इस खबर से हैरान रह जाते हैं.

इसी बीच विमला की पोती कनिका (सादिया खातिब) और टोनी कालरा (कपिल शर्मा) की सगाई की तैयारियां चल रही होती हैं. टोनी का परिवार दिल्ली का एक पारंपरिक पंजाबी परिवार है, जो मिठाई के कारोबार से जुड़ा है.

विमला की शादी की खबर फैलते ही दोनों परिवारों में हलचल मच जाती है. सगाई टूटने की कगार पर पहुंच जाती है और पूरा परिवार विमला को मनाने शिमला पहुंचता है. यहीं कहानी में रिटायर्ड कर्नल थीरन देवराजन (आर. सरथकुमार) की एंट्री होती है, जो विमला के नए जीवन साथी बनते हैं.

निर्देशन और पटकथा

निर्देशक आशीष आर मोहन ने बेहद संवेदनशील विषय को सादगी के साथ पेश किया है. बुजुर्गों के पुनर्विवाह जैसे मुद्दे को बिना भारी-भरकम भाषण दिए सहज तरीके से दिखाया गया है.

फिल्म का पहला हिस्सा काफी मनोरंजक और जीवंत है. पंजाबी परिवार की हलचल और शांत स्वभाव वाले दक्षिण भारतीय कर्नल के बीच का टकराव दर्शकों को हंसी और भावनाओं का संतुलित अनुभव देता है.

हालांकि फिल्म की लंबाई करीब ढाई घंटे होने के कारण दूसरे हिस्से में कहानी थोड़ी धीमी महसूस होती है. कई भावनात्मक दृश्य दोहराव का एहसास कराते हैं, लेकिन निर्देशक ने कहानी की सच्चाई और भावनात्मक संतुलन बनाए रखा है.

फिल्म एक अहम सवाल उठाती है कि क्या उम्र बढ़ने के बाद इंसान को साथी की जरूरत खत्म हो जाती है? कहानी यह संदेश देती है कि बुजुर्गों को केवल परिवार की देखभाल ही नहीं, बल्कि भावनात्मक सहारे की भी जरूरत होती है.

अभिनय

नीतू कपूर का दमदार प्रदर्शन

नीतू कपूर ने विमला के किरदार में गहरी संवेदनशीलता दिखाई है. उनके चेहरे की खामोशी, अकेलापन और अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने की इच्छा दर्शकों को भावुक कर देती है.

कपिल शर्मा का नया अंदाज

कपिल शर्मा इस फिल्म में अपनी कॉमेडी इमेज से अलग नजर आते हैं. टोनी के किरदार में उन्होंने संयमित और गंभीर अभिनय किया है. उन्होंने साबित किया कि वे केवल कॉमेडी ही नहीं, भावनात्मक भूमिकाएं भी बखूबी निभा सकते हैं.

बाकी कलाकारों ने भी छोड़ी छाप

सादिया खातिब ने अपने किरदार में ताजगी भरी ऊर्जा दिखाई है, जबकि आर. सरथकुमार ने कर्नल के रोल में गरिमा और आत्मविश्वास का प्रभावशाली प्रदर्शन किया है.

रिद्धिमा कपूर साहनी ने अपने डेब्यू में आत्मविश्वास से भरा अभिनय किया है. उन्होंने विदेश में रहने वाली बेटी का किरदार निभाया है, जो मुश्किल समय में परिवार के साथ खड़ी नजर आती है.

वहीं समारा साहनी ने अपनी छोटी भूमिका और ‘सेंटी’ गाने में अपनी मौजूदगी से दर्शकों का ध्यान खींचा. नीतू कपूर, रिद्धिमा कपूर साहनी और समारा साहनी को एक साथ स्क्रीन पर देखना फिल्म का खास आकर्षण बनता है.

तकनीकी पहलू

फिल्म के संवाद बेहद स्वाभाविक लगते हैं. बातचीत किसी फिल्मी ड्रामे की बजाय घर-परिवार की वास्तविक चर्चाओं जैसी महसूस होती है.

संगीत

फिल्म का संगीत कहानी के भावनात्मक माहौल को और मजबूत करता है.

‘सेंटी’ एक हल्का-फुल्का और मनोरंजक गीत है.
‘सुनो ना दिल’ भावनात्मक स्पर्श देने वाला मधुर गाना है.

बैकग्राउंड स्कोर कहानी की भावनाओं को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है.

फिल्म का संदेश

‘दादी की शादी’ सिर्फ एक पारिवारिक फिल्म नहीं, बल्कि समाज की पुरानी सोच को चुनौती देने वाली कहानी है. यह फिल्म बताती है कि जिंदगी के किसी भी पड़ाव पर इंसान को प्यार, अपनापन और साथ की जरूरत खत्म नहीं होती.

फैसला

'दादी की शादी' एक साफ-सुथरी, भावुक और पारिवारिक मनोरंजन से भरपूर फिल्म है. यह दर्शकों को हंसाती भी है, भावुक भी करती है और अंत में दिल में एक सकारात्मक एहसास छोड़ जाती है.

अगर आप ऐसी फिल्में पसंद करते हैं जो रिश्तों और भावनाओं को सादगी के साथ पेश करें, तो यह फिल्म आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है.

3.5 स्टार की यह फिल्म अपनी ईमानदार कहानी और शानदार अभिनय के लिए जरूर देखी जा सकती है.

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