अभिनय से एक्शन तक धर्मेंद्र की 10 सुपरहिट फिल्मों ने साबित किया, आज भी सिर्फ वही हैं असली ही-मैन
जब बॉलीवुड धर्मेन्द्र की महान यात्रा पर नजर डालता है, तो उनकी दस बेहतरीन फिल्में उनकी बहुमुखी प्रतिभा, ताकत, भावना और बेजोड़ स्क्रीन उपस्थिति को परिभाषित करती हैं, जो यह साबित करती हैं कि उन्होंने सिनेमा की पीढ़ियों को कैसे आकार दिया।

बॉलीवुड प्रशंसक धर्मेंद्र की विरासत का जश्न मनाते रहते हैं, जिन्हें प्यार से "हिंदी सिनेमा का ही-मैन" कहा जाता है। उनके दशकों लंबे करियर ने इंडस्ट्री को कुछ अविस्मरणीय प्रदर्शन दिए हैं, जिनमें एक्शन से भरपूर भूमिकाओं से लेकर दिल को छू लेने वाले ड्रामा और सहज कॉमेडी तक शामिल हैं। पेश हैं उनकी 10 सदाबहार फ़िल्में जो इस बात को पुख्ता करती हैं कि वह भारत के सबसे सम्मानित और प्रिय अभिनेताओं में से एक क्यों हैं।
1. शोले (1975): एक ऐसी भूमिका जो अमर हो गई
धर्मेंद्र के बारे में कोई भी सूची शोले के बिना पूरी नहीं होती। वीरू के उनके निडर और मज़ेदार किरदार ने हर पीढ़ी के दर्शकों का दिल जीत लिया। अमिताभ बच्चन के साथ उनकी केमिस्ट्री, उनकी भावनात्मक गहराई और "बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना!" जैसी मशहूर लाइन सांस्कृतिक इतिहास बन गई। शोले सिर्फ़ एक ब्लॉकबस्टर से कहीं बढ़कर है—यह एक ऐसा एहसास है जो आज भी भारतीय सिनेमा प्रेमियों को जोड़ता है।
2. चुपके चुपके (1975): जब कॉमेडी मेट क्लास
ऋषिकेश मुखर्जी की क्लासिक कॉमेडी में, धर्मेंद्र ने प्रोफेसर परिमल त्रिपाठी की भूमिका आश्चर्यजनक सहजता से निभाई। फिल्म में उनकी सटीक टाइमिंग और चतुराई भरी अदाकारी ने साबित कर दिया कि एक्शन स्टार हल्के-फुल्के किरदारों में भी कमाल कर सकते हैं। शर्मिला टैगोर के साथ उनकी केमिस्ट्री ने इसे और भी गर्मजोशी दी, जिसने इसे हिंदी सिनेमा की सबसे ज़्यादा देखी जाने वाली कॉमेडी फिल्मों में से एक बना दिया।
3. फूल और पत्थर (1966): सुपरस्टार का जन्म
यह धर्मेंद्र के करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। शाका नाम के एक कठोर लेकिन दयालु किरदार को निभाते हुए, उन्होंने भावनात्मक संवेदनशीलता के साथ-साथ शक्ति का ऐसा संगम दिखाया जो उस समय कम ही देखने को मिलता था। इस अभिनय ने उन्हें फिल्मफेयर नामांकन दिलाया और उन्हें भारतीय सिनेमा के एक अग्रणी सुपरस्टार के रूप में स्थापित किया।
4. सत्यकाम (1969): उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
कई आलोचकों द्वारा उनकी सर्वश्रेष्ठ कृति मानी गई, सत्यकाम में धर्मेंद्र ने एक गहरी भावनात्मक भूमिका निभाई। भ्रष्ट दुनिया में ईमानदारी की रक्षा के लिए संघर्षरत सत्यप्रिय के रूप में, उनके अभिनय ने आंतरिक संघर्ष और शांत गरिमा को दर्शाया। आज भी, यह फिल्म अपनी हृदयस्पर्शी गहराई और कलात्मक प्रतिभा के लिए याद की जाती है।
5. मेरा गाँव मेरा देश (1971): एक्शन विद इमोशन
शोले से पहले, इस फ़िल्म में धर्मेंद्र को एक सुधरे हुए अपराधी के रूप में दिखाया गया था जो बुराई के ख़िलाफ़ लड़ता है। उनके ज़बरदस्त अभिनय और संवेदनशीलता के क्षणों ने उनकी एक्शन हीरो वाली छवि की नींव रखी जिसने आगे चलकर बॉलीवुड के कई ट्रेंड्स को आकार दिया। यह फ़िल्म काफ़ी सफल रही और पर्दे पर उनकी मज़बूत उपस्थिति को और मज़बूत किया।
6. सीता और गीता (1972): हल्की-फुल्की और आकर्षक
हेमा मालिनी के साथ, धर्मेंद्र ने एक और शानदार अभिनय किया। अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और सहज आकर्षण के साथ, उन्होंने कहानी में ऊर्जा और सरलता भर दी। उनका किरदार ताज़ा और मनोरंजक था, जिसने फिल्म को पारिवारिक दर्शकों के बीच पसंदीदा बना दिया।
7. अनुपमा (1966): कोमल कवयित्री
यहाँ धर्मेंद्र ने अपनी बेढंगी छवि को त्यागकर एक शांत, दयालु कवि का किरदार निभाया। उनकी सूक्ष्म भाव-भंगिमाओं और मृदु संवाद अदायगी ने उनके व्यक्तित्व के कोमल पक्ष को उजागर किया। संयमित रोमांटिक कहानी ने "अनुपमा" को उस दौर की सबसे खूबसूरत फिल्मों में से एक बना दिया।
8. राजा जानी (1972): संपूर्ण मनोरंजन पैकेज
राजा जानी में ड्रामा, रोमांस, साज़िश और एक्शन का मिश्रण था। धर्मेंद्र ने एक बहुस्तरीय किरदार निभाया, जिसमें करिश्मा और उग्रता का संतुलन था। दर्शकों को हेमा मालिनी के साथ उनकी केमिस्ट्री बेहद पसंद आई और इस फिल्म ने पारंपरिक भूमिकाओं से परे एक मनोरंजक अभिनेता के रूप में उनकी विविधता को उजागर किया।
9. हकीकत (1964): प्रारंभिक प्रतिभा
स्टार बनने से पहले, धर्मेंद्र ने इस देशभक्तिपूर्ण युद्ध फिल्म में दमदार अभिनय किया था। भारत-चीन युद्ध पर आधारित इस फिल्म में उन्होंने एक सैनिक के भावनात्मक संघर्ष को पूरी प्रामाणिकता के साथ चित्रित किया। उनके सहज अभिनय ने प्रशंसा बटोरी और यह संकेत दिया कि वे एक शक्तिशाली स्टार बनने के लिए किस्मत में थे।
10. प्रतिज्ञा (1975): सर्वश्रेष्ठ जन आकर्षण
प्रतिज्ञा में धर्मेंद्र ने एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभाई जो पुलिस अधिकारी बनकर बदला लेना चाहता है। कॉमेडी, एक्शन और भावनाओं का संतुलित मिश्रण वाली यह फिल्म एक बड़ी हिट साबित हुई। इस सफलता ने उन्हें एक ऐसे एक्शन हीरो के रूप में स्थापित किया जो आलोचकों और दर्शकों, दोनों को प्रभावित कर सकता था।


