हथियार उठाया तो हिसाब होगा’, अमित शाह का सीधा संदेश, विकास और सुरक्षा की डबल रणनीति से नक्सल नेटवर्क पर बड़ा वार
लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कहा कि जो कोई हथियार उठाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और सरकार विकास के साथ-साथ सख्त सुरक्षा नीति पर भी बराबर जोर दे रही है।

गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि यह नरेंद्र मोदी की सरकार है। जो भी हथियार उठाएगा उसका हिसाब चुकता किया जाएगा। सरकार हिंसा को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं करेगी। जो लोग आत्मसमर्पण करना चाहते हैं उनके लिए रास्ता खुला है। लेकिन जो हिंसा का रास्ता चुनेंगे उन्हें कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
नक्सलवाद का असली कारण क्या
अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद की जड़ गरीबी या विकास की कमी नहीं है। यह एक खास विचारधारा से जुड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि इस सोच ने लोगों को हिंसा की ओर धकेला है। सरकार इसे खत्म करने के लिए ठोस कदम उठा रही है।
विकास और सुरक्षा दोनों पर जोर
सरकार नक्सल समस्या से निपटने के लिए दोहरी रणनीति पर काम कर रही है। एक तरफ विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। दूसरी तरफ सुरक्षा बलों को मजबूत किया जा रहा है। प्रभावित इलाकों में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। इससे हालात तेजी से बदल रहे हैं।
आदिवासियों को गुमराह करने का आरोप
अमित शाह ने कहा कि नक्सलियों ने आदिवासियों को गुमराह किया है। उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि वे उनके अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। लेकिन असल में यह हिंसक विचारधारा है। इससे आदिवासियों को ही सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।
बस्तर में बदले हालात का उदाहरण
गृह मंत्री ने बस्तर का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले वहां विकास नहीं पहुंच पाता था। नक्सलियों के डर से हालात खराब थे। लेकिन अब स्थिति बदल रही है। वहां विकास तेजी से हो रहा है। लोगों को नई सुविधाएं मिल रही हैं।
कांग्रेस पर साधा निशाना
अमित शाह ने कांग्रेस पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतने सालों तक आदिवासी क्षेत्र विकास से दूर क्यों रहे। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार के दौरान इन इलाकों में विकास पहुंचा है। अब नक्सलवाद खत्म करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।
सुरक्षा बलों की भूमिका अहम
गृह मंत्री ने सुरक्षा बलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि अर्धसैनिक बल, सीआरपीएफ, राज्य पुलिस और स्थानीय लोग मिलकर काम कर रहे हैं। इनके प्रयासों से नक्सलवाद कमजोर हुआ है। यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच रही है।


