ऑस्ट्रेलिया से 15 भारतीय डिपोर्टे: चार्टर्ड फ्लाइट से दिल्ली भेजे गए, कई पर गंभीर आरोप
ऑस्ट्रेलिया ने सख्त कार्रवाई करते हुए 15 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट कर भारत भेज दिया. सभी को विशेष चार्टर्ड फ्लाइट से दिल्ली लाया गया, जहां पहुंचते ही उन्हें सुरक्षा एजेंसियों को सौंप दिया गया.

नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया ने गुरुवार को 15 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट कर दिया, जिन्हें एक विशेष चार्टर्ड फ्लाइट के जरिए दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लाया गया. भारत पहुंचते ही इन सभी को सुरक्षा एजेंसियों के हवाले कर दिया गया. इनमें से 9 लोग पंजाब से, जबकि अन्य हरियाणा, उत्तराखंड और तेलंगाना से जुड़े बताए जा रहे हैं.
डिपोर्ट किए गए इन लोगों की उम्र 25 से 45 वर्ष के बीच है. पंजाब पुलिस की टीम एयरपोर्ट से ही अपने राज्य के नागरिकों को साथ ले गई. इस मामले ने एक बार फिर विदेशों में अवैध तरीके से रहने और अपराध में शामिल भारतीयों के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है.
डिपोर्टेशन के पीछे क्या रही वजह
रिपोर्ट्स के अनुसार, इन भारतीय नागरिकों को ऑस्ट्रेलिया से निकालने के पीछे कई कारण सामने आए हैं. इनमें आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता, वीजा नियमों का उल्लंघन और अधिकारियों के साथ सहयोग न करना प्रमुख हैं.
बताया गया है कि 15 में से केवल 2 लोगों के पास ही वैध पासपोर्ट थे, जबकि बाकी को भारतीय दूतावास द्वारा जारी 'आपातकालीन प्रमाणपत्र' के जरिए वापस भेजा गया.
चार्टर्ड फ्लाइट से क्यों भेजा गया
इन सभी को वापस लाने के लिए एक विशेष चार्टर्ड विमान का इस्तेमाल किया गया. अधिकारियों के अनुसार, कई व्यक्तियों का व्यवहार असहयोगी था, जिससे उन्हें सामान्य यात्री उड़ानों में भेजना जोखिम भरा हो सकता था.
इस फ्लाइट में अतिरिक्त सुरक्षा बल, मेडिकल स्टाफ और एस्कॉर्ट टीम तैनात की गई थी ताकि यात्रा सुरक्षित तरीके से पूरी हो सके.
किन डिटेंशन सेंटर में रखे गए थे
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन लोगों को ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर्स में रखा गया था, जिनमें शामिल हैं:
- योंगा हिल इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर (पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया)
- मेलबर्न इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर (विक्टोरिया)
- विलावुड इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर (न्यू साउथ वेल्स)
डिपोर्ट किए गए लोगों के खिलाफ आरोप
डिपोर्ट किए गए अधिकांश लोगों पर गंभीर आपराधिक मामलों के आरोप हैं. इनमें ड्रग्स रखना, चोरी, धोखाधड़ी, हिंसा, जमानत का उल्लंघन और पुलिस के साथ दुर्व्यवहार जैसे अपराध शामिल हैं.
- जसवंत सिंह (34 वर्षीय): हथियार और ड्रग्स से जुड़े मामलों के साथ चोरी और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप.
- अंग्रेज सिंह (32 वर्षीय): धोखाधड़ी, ड्रग्स अपराध और अवैध प्रवेश के मामले.
- सतिंदरजीत सिंह शेरगिल (31 वर्षीय): घरेलू हिंसा और पुलिस के खिलाफ अपराध.
- हरप्रीत सिंह सिद्धू (30 वर्षीय): ड्रग्स, धोखाधड़ी और जमानत उल्लंघन.
- जगजीत सिंह सिद्धू (35 वर्षीय): सेंधमारी और वाहन चोरी के मामले.
- जसप्रीत सिंह (37 वर्षीय): कई मामलों में आरोपित, हालांकि दोष सिद्ध नहीं.
- कंवलजीत सिंह (27 वर्षीय): चोरी, ड्रग्स और पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश.
- रणजीत सिंह (35 वर्षीय): हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थों से जुड़े अपराध.
- हरप्रीत सिंह (41 वर्षीय): पुलिस पर हमला और गंभीर आरोपों में शामिल.
- श्रुति शर्मा (45 वर्षीय): “हालांकि, वीजा (इमिग्रेशन) नियमों के उल्लंघन और शुरुआत में अधिकारियों के साथ सहयोग न करने के कारण इन्हें डिपोर्ट किया गया.”
- अब्दुल्ला सालेह बहाताब (31 वर्षीय): धमकी देने और डराने-धमकाने के मामलों में शामिल.
पंजाब सरकार का रुख
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले पर कहा है कि सरकार यह जांच करेगी कि इन लोगों के दस्तावेज कैसे तैयार हुए और किन लोगों ने इसमें मदद की. उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर विदेश मंत्रालय से संपर्क किया जाएगा और मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाएगा.
भारत लौटने के बाद क्या होगा
अधिकारियों के अनुसार, भारत लौटने के बाद इन लोगों को प्रारंभिक सहायता दी जाएगी. इसमें नकद मदद, घर तक पहुंचाने की व्यवस्था और अस्थायी ठहरने की सुविधा शामिल हो सकती है.
यह घटना दर्शाती है कि ऑस्ट्रेलिया अपने इमिग्रेशन और कानून व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है, खासकर उन विदेशी नागरिकों के खिलाफ जो नियमों का उल्लंघन करते हैं.


