New Delhi: दिल्ली में सरकार की आयुष्मान वय वंदना योजना अब बुजुर्गों के लिए राहत की सांस बन रही है. महंगा इलाज, लंबी कतारें और पैसों की तंगी जैसी मुश्किलों के बीच ये योजना अब बुजुर्गों के लिए एक मजबूत सहारा बन चुकी है. इसका ताजा उदाहरण शाहदरा की रहने वाली 81 साल की सुरेंद्र कांता सचदेवा हैं, जिनकी ज़िंदगी इस योजना ने एक बार फिर पटरी पर ला दी.
सुरेंद्र कांता को करीब 15 साल पहले दिल की धड़कन की परेशानी के चलते पेसमेकर लगाया गया था. लेकिन हाल ही में तबीयत बिगड़ी और उन्हें फिर से पेसमेकर बदलवाने की ज़रूरत पड़ी. ये ऑपरेशन लगभग 90 हजार रुपये का था, जो एक आम परिवार के लिए बड़ा बोझ होता. उनके बेटे संजय, जो खुद स्वरोज़गार करते हैं, ने पहले पैसों का इंतजाम करने की कोशिश की, लेकिन फिर उन्हें इस योजना के बारे में जानकारी मिली.
संजय ने इंटरनेट पर योजना की जानकारी जुटाई और रात के करीब 12:30 बजे आयुष्मान भारत पोर्टल पर मां का कार्ड बनवाया. दो दिन बाद उन्होंने कार्ड अस्पताल में दिखाया और इलाज की प्रक्रिया शुरू हो गई. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में उनकी मां को भर्ती किया गया, निगरानी में रखा गया और आखिरकार 30 अप्रैल को सफल सर्जरी हुई. अब सुरेंद्र कांता सचदेवा स्वस्थ हैं और घर लौट चुकी हैं.
अब तक दिल्ली में करीब 27,400 बुजुर्गों को इस योजना का लाभ मिल चुका है. सबसे ज्यादा कार्ड उत्तर-पश्चिम जिले में बने हैं और सबसे कम दक्षिण-पूर्व जिले में. इसका मतलब है कि लोग अब जागरूक हो रहे हैं और इस योजना का लाभ उठाने लगे हैं.
शाहदरा के विधायक संजय गोयल ने कहा कि यह योजना सरकार के उस वादे का उदाहरण है जिसमें कहा गया था कि बुजुर्गों को इलाज की चिंता नहीं करने दी जाएगी. अब इसका असर जमीन पर दिख भी रहा है. आयुष्मान वय वंदना योजना सिर्फ एक स्कीम नहीं, ये एक भरोसा है — उन बुजुर्गों के लिए, जिनकी जेब में पैसा नहीं लेकिन जीने की उम्मीद बाकी है. First Updated : Saturday, 03 May 2025