AJL और पूर्व CM भूपिंदर सिंह हुड्डा को HC से मिली बड़ी राहत, कोर्ट ने आरोपों किया रद्द...दी क्लीन चिट
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंचकूला प्लॉट पुनः आवंटन मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और एजेएल को बड़ी राहत देते हुए सभी आपराधिक आरोप रद्द कर दिए हैं. अदालत ने इस फैसले में उन्हें पूर्ण क्लीन चिट दी है.

नई दिल्ली : हरियाणा की सियासत और कानूनी गलियारों से एक अत्यंत महत्वपूर्ण खबर निकलकर सामने आई है. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बुधवार को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को जड़ से खत्म कर दिया है. जस्टिस त्रिभुवन दहिया की खंडपीठ ने माना कि पंचकूला के प्लॉट पुनः आवंटन में कोई धांधली नहीं हुई थी. यह ऐतिहासिक फैसला हुड्डा के लिए बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है.
अदालत ने सुनाया महत्वपूर्ण फैसला
आपको बता दें कि अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में यह स्पष्ट किया कि वर्ष 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा द्वारा लिया गया निर्णय पूरी तरह वैध था. इस निर्णय को 2006 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) की बैठक में सर्वसम्मति से मंजूरी प्रदान की गई थी. हाई कोर्ट ने कहा कि आज तक किसी भी न्यायालय ने इस आवंटन को अवैध घोषित नहीं किया है. इसलिए. बिना किसी पुख्ता साक्ष्य के इसे आपराधिक साजिश मानना अनुचित और कानून के विरुद्ध है.
भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगाए जा सकते
जस्टिस दहिया की पीठ ने कहा कि एजेएल ने पुनः आवंटन के लिए निर्धारित पूरी राशि और एक्सटेंशन फीस का समय पर भुगतान कर दिया था. कंपनी ने आवंटित प्लॉट पर निर्माण कार्य भी पूरा कर लिया था. जिसके आधार पर अगस्त 2014 में प्राधिकरण ने उसे ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया था. जब संपत्ति का मालिक सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन कर चुका है और सर्टिफिकेट प्राप्त कर चुका है. तो उस पर भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगाए जा सकते.
वित्तीय नुकसान का अभाव
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू वित्तीय नुकसान का दावा था. जिसे अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट ने पाया कि प्राधिकरण को कोई नुकसान होने की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी. यहाँ तक कि सरकारी ऑडिटरों ने भी अपनी शुरुआती आपत्तियों को अब वापस ले लिया था. अदालत ने कहा कि केवल बाजार भाव के आधार पर काल्पनिक नुकसान का अनुमान लगाकर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता. इससे स्पष्ट है कि सरकारी खजाने को कोई क्षति नहीं पहुँची.
न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग
सीबीआई ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप लगाए थे. जिसके बाद 2021 में ट्रायल कोर्ट ने आरोप तय किए. हालांकि. हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सीबीआई द्वारा पेश साक्ष्य प्रथम दृष्टया भी आरोपों की पुष्टि नहीं करते हैं. अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस मामले में अभियोजन जारी रखना केवल न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा. इसलिए सभी आरोपियों को तत्काल प्रभाव से इस केस से बरी करने का आदेश दिया गया है.
हुड्डा के लिए बड़ी राहत
साजिश या धोखाधड़ी के कोई भी ठोस सबूत न मिलने के कारण यह फैसला हुड्डा के राजनीतिक भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. अदालत ने माना कि प्रशासनिक निर्णयों को बिना किसी आधार के आपराधिक रंग देना न्यायोचित नहीं है. हुड्डा के समर्थकों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे सत्य की जीत बताया है. लंबे समय से चल रही इस कानूनी लड़ाई का सुखद अंत पूर्व मुख्यमंत्री और एजेएल के लिए बड़ी राहत लेकर आया है. जिससे उनकी छवि बेदाग हुई है.


