लोकसभा में महिला आरक्षण पर सियासी घमासान, अमित शाह ने भ्रम तोड़ते हुए कहा दक्षिण राज्यों को नहीं होगा कोई नुकसान
महिला आरक्षण बिल पर संसद में तीखी बहस जारी है। अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इस बिल से किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा।

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस बिल को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है। खास तौर पर दक्षिण भारत के राज्यों को लेकर भ्रम बनाया जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि किसी भी राज्य का नुकसान नहीं होगा। यह बयान सीधे तौर पर विपक्ष के आरोपों का जवाब माना जा रहा है।
अमित शाह ने क्या दी सफाई?
अमित शाह ने कहा कि यह बिल महिलाओं को अधिकार देने के लिए है। इसे किसी क्षेत्र या राज्य के खिलाफ नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा साफ है। देश की आधी आबादी को बराबरी का मौका देना जरूरी है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि इस मुद्दे पर राजनीति न करें।
क्या पीएम मोदी ने भी रखा पक्ष?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस बहस की शुरुआत में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का मतलब सिर्फ बुनियादी ढांचा नहीं है। असली विकास तब होगा जब महिलाएं नीति निर्धारण का हिस्सा बनेंगी। उन्होंने इसे ऐतिहासिक मौका बताया। उन्होंने सभी सांसदों से अपील की कि इस अवसर को हाथ से न जाने दें।
क्या NDA के सामने है चुनौती?
इस विधेयक को पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत जरूरी है। फिलहाल एनडीए के पास यह संख्या नहीं है। ऐसे में सरकार को विपक्ष का समर्थन चाहिए। यही वजह है कि संसद में माहौल गर्म है। आने वाले समय में राजनीतिक समीकरण अहम भूमिका निभाएंगे।
क्या बढ़ेंगी लोकसभा की सीटें?
इस बिल के साथ एक बड़ा प्रस्ताव भी जुड़ा हुआ है। लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने की बात कही गई है। इसके लिए परिसीमन प्रक्रिया लागू होगी। इससे देश की चुनावी तस्वीर में बड़ा बदलाव आ सकता है।
परिसीमन को लेकर क्या तैयारी है?
सरकार परिसीमन आयोग बनाने की तैयारी कर रही है। यह आयोग नई सीटों का बंटवारा करेगा। जनसंख्या के आधार पर सीटों को तय किया जाएगा। इससे कई राज्यों के बीच संतुलन बदल सकता है। यह प्रक्रिया काफी अहम मानी जा रही है।
आगे क्या होगा सियासी असर?
महिला आरक्षण बिल पर बहस अभी जारी है। सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है। विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा हो सकता है। देश की राजनीति में इसका दूरगामी असर देखने को मिल सकता है।


