सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बंगाल में SIR विवाद के बीच जिनका नाम क्लियर होगा वही डाल सकेंगे वोट

सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल के वोटरों को लेकर बड़ा आदेश दिया। SIR में हटे नामों पर नियम तय किए। अब सिर्फ क्लियर हुए लोग ही वोट डाल पाएंगे।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के SIR मामले में बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जिन मतदाताओं के नाम ट्रिब्यूनल क्लियर करेगा, वही वोट डाल सकेंगे। यह फैसला चुनाव प्रक्रिया को साफ रखने के लिए लिया गया है। कोर्ट ने नियम तय कर दिए हैं। अब बिना क्लियर हुए नामों को वोटिंग का अधिकार नहीं मिलेगा।

किसे मिलेगा वोट डालने का अधिकार?

कोर्ट के आदेश के मुताबिक जिन लोगों का नाम 21 अप्रैल तक क्लियर हो जाएगा, वे पहले चरण में वोट डाल सकेंगे। वहीं जिनका नाम 27 अप्रैल तक साफ होगा, वे दूसरे चरण में मतदान कर पाएंगे। यानी अब पूरी प्रक्रिया ट्रिब्यूनल के फैसले पर निर्भर करेगी। इससे स्थिति साफ हो गई है।

क्या पहले अलग था कोर्ट का रुख?

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि जिनकी अपील लंबित है, उन्हें वोट देने की इजाजत नहीं दी जा सकती। अदालत ने साफ कहा कि अधूरी प्रक्रिया में राहत देना ठीक नहीं है। इससे चुनाव की निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है।

कितने लोगों के नाम हटाए गए थे?

SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए गए थे। बताया जा रहा है कि लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से बाहर हुए। इसके खिलाफ 34 लाख से ज्यादा अपीलें दाखिल की गई हैं। इनमें से कई मामलों पर अभी सुनवाई चल रही है। इससे मामला और जटिल हो गया है।

क्या कोर्ट ने अपील पर क्या कहा?

कोर्ट ने कहा कि अगर ट्रिब्यूनल अपील मंजूर कर लेता है, तो नाम फिर से जोड़ा जा सकता है। लेकिन जब तक फैसला नहीं होता, वोट का अधिकार नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने साफ किया कि नियम सबके लिए एक जैसे होंगे। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी।

क्या राजनीतिक दलों की मांग ठुकराई गई?

इस मामले में कई राजनीतिक दलों ने मांग की थी। उन्होंने कहा था कि लंबित अपील वाले लोगों को भी वोट का अधिकार मिलना चाहिए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि ऐसा करना चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करेगा। इस फैसले का असर आने वाले चुनाव पर पड़ेगा। अब वोटर लिस्ट को लेकर सख्ती बढ़ेगी। लोगों को अपने नाम क्लियर कराने पर ध्यान देना होगा। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि लोकतंत्र में वोट जरूरी है, लेकिन नियमों के साथ ही मिलेगा।

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