क्या फिर आएगा टैरिफ का टेरर? भारत पर टैरिफ और पाकिस्तान को छूट?

एक तरफ जहां ट्रंप लगातार भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय यानी यूएसटीआर ने भारत सहित 60 देशों और अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई का प्रस्ताव रखा है।

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Edited By: JBT Desk

दुनिया के विवादास्पद नेताओं में शुमार अमेरिका के राष्ट्रपति ईरान  युद्ध के बीच एक और राजनीतिक शरारत करने की तैयारी कर रहे हैं। अमेरिका ने भारत सहित 60 देशों और अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ बड़ी व्यापारिक कार्रवाई का प्रस्ताव रखा है। यूएसटीआर यानी अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि का कहना है कि इन देशों ने कथित तौर पर जबरन श्रम से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लागू नहीं किए हैं। अमेरिकी एजेंसी ने इसे अमेरिकी व्यापार और उद्योग के लिए नुकसानदायक बताते हुए अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव किया है। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए लगातार बातचीत चल रही है। 

प्रस्ताव में 60 अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यायल ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि 1974 के बाद अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 के तहत जांच के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया है कि 60 अर्थव्यवस्थाओं की नीतियां और कार्यप्रणालियां अमेरिकी व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। यूएसटीआर के अनुसार इन देशों द्वारा जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को प्रभावी ढंग से रोकने में विफल रहने के कारण अमेरिकी कारोबार प्रभावित हो रहा है। इसलिए इन मामलों को अमेरिका व्यापार कानून के तहत कार्रवाई  के लायक माना गया है। 

लिस्ट में भारत का नाम शामिल

यीएसटीआर ने जिन 54 देशों और अर्थव्यवस्थाओं को इस श्रेणी में रखा है उनमें भारत भी शामिल है। इस लिस्ट में भारत के अलावा, आस्ट्रेलिया, बहरीन, बांग्लादेश, चीन, जापान, कुवैत, सऊदी अबर, सिंगापुर, ब्रिटेन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी शामिल हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने कहा कि अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को रोकने में विफल रहना स्वीकार्य नहीं है। उनके अनुसार  इससे अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। 

संबंधित देशों पर लगेगा अतिरिक्त शुल्क 

जांच के बाद आए निष्कर्षों के आधार पर यूएसटीआर ने संबंधित देशों से आने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव के अनुसार जिन देशों ने जबरन श्रम से बने उत्पादों पर प्रतिबंध लागू कर दिया है या ऐसा करने के लिए प्रतिबद्धता जताई है, उन पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। वहीं बाकी देशों पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा कपड़ा और परिधान क्षेत्रों से जुड़े कुछ आयातों के लिए अलग व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है। 

कब हुई थी जांच शुरू?

यूएसटीआर ने बताया कि इस मामले की जांच 12 मार्च को शुरू की गई थी। जांच के दौरान करीब गवाहों के बयान लिए गए और सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया के दौरान 500 टिप्पणियां प्राप्त हुईं। इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद एजेंसी यह निष्कर्ष तैयार किए हैं। 

कार्रवाई की असली वजह क्या है?

अमेरिकी जांच एजेंसी का कहना है कि जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध नहीं होने से विश्व स्तर पर श्रम शोषण खत्म करने के प्रयास कमजोर पड़ते हैं। यूएसटीआर के अनुसार इससे कम लागत पर उत्पादन करने वाले उत्पादों को अनुचित लाभ मिलता है। इसके बाजार की प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है और साथ ही उन कंपनियों को नुकसान होता है जो जबरन श्रम का उपयोग नहीं करतीं। 

भारत-अमेरिका संबंध पर क्या पड़ेगा असर?

यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब भारत-अमेरिका द्विपक्षीय समझौते के पहले चरण को अंतिम रुप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में नई दिल्ली और वॉशिंगटन के अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। इन बातचीत में बाजार पहुंच, शुल्क, डिजिटल व्यापार और कृषि जैसे मुद्दे प्रमुख रुप से शामिल रहे हैं। 

भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार अमेरिका 

समय-समय पर व्यापारिक मतभेद सामने के आने के बावजूद अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। दोनों देशों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार हाल के वर्षों में 120 डॉलर से अधिक स्तर को पार कर चुका है। भारत और अमेरिका दोनों ही आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहरा चुके हैं। आपको बता दें कि यूएसटीआर ने प्रस्तावित उपायों पर 6 जुलाई तक टिप्पणियां दी जा सकती है। इसके बाद 7 जुलाई को सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की जाएगी। सुनवाई और प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।  
 

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