ईरान संघर्ष के बीच भारत को राहत, रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका ने दी 30 दिन की छूट

ईरान-अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच अमेरिका ने भारत को राहत दी है. अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय रिफाइनरियों को रूस से तेल खरीद जारी रखने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट देने की घोषणा की है, ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सके.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है. इसी बीच अमेरिका ने भारत को बड़ी राहत देते हुए रूसी तेल की खरीद जारी रखने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट देने का फैसला किया है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब मध्य पूर्व में संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में उछाल की आशंका जताई जा रही है.

अमेरिका का कहना है कि यह फैसला ऊर्जा आपूर्ति में संभावित संकट को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. ईरान से जुड़े हालिया घटनाक्रम और खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता के कारण वैश्विक बाजार में दबाव बढ़ रहा है, ऐसे में भारत जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देश के लिए यह अस्थायी राहत अहम मानी जा रही है.

अमेरिकी वित्त सचिव ने की घोषणा

शुक्रवार को अमेरिका ने घोषणा की कि भारतीय रिफाइनरियों को रूसी ऊर्जा खरीदने के लिए 30 दिनों की “अस्थायी” छूट दी जा रही है. अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने इस फैसले की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी.

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम रूस को बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए नहीं है. उन्होंने कहा कि यह छूट केवल उन लेनदेन पर लागू होगी जो समुद्र में फंसे तेल से जुड़े हैं.उन्होंने कहा कि यह कदम रूस को "महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ" नहीं देगा क्योंकि "क्योंकि यह केवल समुद्र में फंसे तेल से संबंधित लेनदेन को ही अधिकृत करता है".

भारत को अहम साझेदार बताया

ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा कि भारत को दी गई यह अस्थायी छूट ईरान पर वैश्विक दबाव बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है. उनका कहना है कि ईरान वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है.

वित्त मंत्री ने एक्स पर लिखा, "भारत संयुक्त राज्य अमेरिका का एक महत्वपूर्ण साझेदार है, और हम पूरी उम्मीद करते हैं कि नई दिल्ली अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगी."

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता

वैश्विक तनाव के बीच ईरान ने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का दावा किया है. इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और मुद्रास्फीति के दबाव की आशंका बढ़ गई है.

ईरान और ओमान के बीच स्थित यह रणनीतिक जलमार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. माना जाता है कि दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है, इसलिए इसे वैश्विक ऊर्जा व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में गिना जाता है.

भारत के पास 74 दिनों का तेल भंडार

ऊर्जा आपूर्ति को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच भारत सरकार ने अपने मौजूदा भंडार की स्थिति स्पष्ट की है. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस सप्ताह की शुरुआत में राज्यसभा में जानकारी दी कि भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार 74 दिनों तक की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त हैं.

मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से फिलहाल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को कोई तत्काल खतरा नहीं है.

क्या भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद किया?

अमेरिका द्वारा दी गई यह छूट ऐसे समय आई है जब कुछ सप्ताह पहले यह दावा किया गया था कि भारत रूसी कच्चे तेल की खरीद रोकने की प्रतिबद्धता जता चुका है. हालांकि भारतीय अधिकारियों ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है.

वहीं रूस ने भी इन संकेतों को खारिज करते हुए कहा है कि भारत द्वारा तेल खरीद कम किए जाने की कोई ठोस वजह नहीं है. रूस की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने कहा, "भारत द्वारा रूसी हाइड्रोकार्बन की खरीद दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करती है."

टैरिफ में भी दी गई राहत

भारत और रूस के बीच ऊर्जा संबंधों पर चर्चा के बीच अमेरिका ने भारत से आयात पर लागू टैरिफ में भी कटौती की है. अमेरिका ने मौजूदा टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है.

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