मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत का बड़ा फैसला, फंसे विदेशियों को वीजा एक्सटेंशन और जुर्माने से राहत

मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण भारत में फंसे विदेशी नागरिकों को राहत देते हुए सरकार ने वीजा और ई-वीजा की अवधि एक महीने के लिए मुफ्त बढ़ाने तथा ओवरस्टे पर लगने वाले जुर्माने को माफ करने की घोषणा की है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब दुनिया के कई देशों की यात्रा व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है. इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने देश में फंसे विदेशी नागरिकों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है. सरकार ने ऐसे लोगों के वीजा की अवधि बढ़ाने और तय समय से अधिक रुकने पर लगने वाले जुर्माने को माफ करने का फैसला किया है. इस कदम का उद्देश्य उन यात्रियों की मदद करना है, जिनकी यात्रा योजनाएं क्षेत्रीय संघर्ष के कारण प्रभावित हुई हैं.

इस संबंध में दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने एक अधिसूचना जारी की है. इसमें कहा गया है कि जिन विदेशी नागरिकों के वीजा या ई-वीजा की अवधि खत्म हो रही है या जल्द समाप्त होने वाली है, उन्हें एक महीने का मुफ्त विस्तार दिया जाएगा. यह प्रक्रिया संबंधित विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालयों के माध्यम से पूरी की जाएगी. अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले से उन यात्रियों को राहत मिलेगी जो मौजूदा हालात के कारण समय पर भारत से बाहर नहीं जा पा रहे हैं.

ओवरस्टे पर लगने वाला जुर्माना माफ

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई विदेशी नागरिक 28 फरवरी के बाद तय समय से अधिक भारत में ठहर गया है और इसका कारण मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष है, तो उस पर लगने वाला जुर्माना माफ कर दिया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, कई यात्रियों की उड़ानें रद्द या स्थगित हो गई हैं, जिसके कारण वे समय पर यात्रा नहीं कर पा रहे हैं.

मुफ्त मिलेगा निकास परमिट

भारत सरकार ने यह भी कहा है कि जिन विदेशी नागरिकों की यात्रा योजनाएं बाधित हो गई हैं, उन्हें मुफ्त में निकास परमिट दिया जाएगा. जब अंतरराष्ट्रीय उड़ान मार्ग सामान्य हो जाएंगे, तब वे आसानी से भारत छोड़ सकेंगे. अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई व्यक्ति इस स्थिति के कारण समय पर निकास परमिट या वीजा विस्तार के लिए आवेदन नहीं कर पाता, तो इसे आव्रजन नियमों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा.

आपात स्थिति में अस्थायी लैंडिंग परमिट

सरकार ने उन विदेशी यात्रियों के लिए भी व्यवस्था की है जिनकी उड़ानें भारत की ओर मोड़ दी जाती हैं. ऐसे यात्रियों को बिना किसी शुल्क के अस्थायी लैंडिंग परमिट (TLP) दिया जाएगा, ताकि वे सुरक्षित रूप से भारत में रुक सकें.

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर

यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है. हाल के दिनों में अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं. इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और इजरायल को निशाना बनाते हुए जवाबी कार्रवाई की है. इससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति और अधिक जटिल हो गई है.

कतर से भारतीयों की वापसी जारी

इस बीच दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने भी एक एडवाइजरी जारी की है. इसमें बताया गया है कि कतर एयरवेज की उड़ानों के जरिए करीब 500 भारतीय नागरिकों ने कतर से भारत और अन्य देशों के लिए यात्रा की है. दूतावास के अनुसार इन यात्रियों में कई लोग कोच्चि और अन्य गंतव्यों के लिए रवाना हुए. एयरलाइन ने मानवीय आधार पर दो भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर और उनके परिवार के सदस्यों को भी कोच्चि पहुंचाने में मदद की.

सीमित रूप से खुला है कतर का हवाई क्षेत्र

दूतावास ने बताया कि कतर का हवाई क्षेत्र अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है. केवल आंशिक रूप से उड़ान संचालन की अनुमति दी गई है, जिसके कारण उड़ानों की संख्या सीमित है. हालांकि कतर एयरवेज ने 14 मार्च को मुंबई के लिए एक उड़ान संचालित करने की योजना बनाई है.

ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा असर

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है. विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थिति संवेदनशील बनी हुई है. यह समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है.

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