रावतभाटा के अनुज अग्निहोत्री बने UPSC 2025 टॉपर, मां ने बताया सफलता का राज
राजस्थान के अनुज अग्निहोत्री ने UPSC परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर देश में पहला स्थान प्राप्त किया है. एम्स जोधपुर से MBBS करने वाले अनुज ने तीसरे प्रयास में यह बड़ी सफलता हासिल की.उनकी मां ने बेटे की सख्त दिनचर्या और अनुशासन को इस उपलब्धि का सबसे बड़ा कारण बताया.

नई दिल्ली: चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा के रहने वाले अनुज अग्निहोत्री ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया है. उनकी इस उपलब्धि ने न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गर्व से भर दिया है. अनुज की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद सिविल सेवा की राह चुनी और कड़ी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया.
एम्स जोधपुर से एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले अनुज का रुझान पढ़ाई के दौरान ही सिविल सेवाओं की ओर हो गया था. इसके बाद उन्होंने पूरी तरह यूपीएससी की तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया. इससे पहले भी वे सिविल सेवा परीक्षा पास कर चुके थे और डीएएनआईसीएस कैडर में सेवाएं दे चुके हैं.
एम्स जोधपुर से एमबीबीएस, फिर सिविल सेवा की ओर बढ़ाया कदम
अनुज अग्निहोत्री ने एम्स जोधपुर से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की. मेडिकल की पढ़ाई के दौरान ही उनका झुकाव प्रशासनिक सेवा की ओर बढ़ने लगा. इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की और लगातार मेहनत के दम पर इस प्रतिष्ठित परीक्षा में शीर्ष स्थान हासिल किया.
उन्होंने पहले भी यूपीएससी परीक्षा पास की थी और डीएएनआईसीएस कैडर में अपनी सेवाएं दे चुके थे. लेकिन उन्होंने आगे बढ़ते हुए फिर से प्रयास किया और इस बार देश में पहली रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया.
मां ने बताया बेटे की सख्त दिनचर्या
अनुज की मां मंजू अग्निहोत्री ने बेटे की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा,"वह उसकी मेहनत है और भगवान की कृपा को ही मैं सबसे बड़ी बात मानती हूं. बाकी तो अपनी तरफ से हर मां जो करती है, वही मैंने भी किया. इसमें कोई अलग से खास बात नहीं है."
उन्होंने बेटे की दिनचर्या के बारे में बताते हुए कहा,"इसकी दिनचर्या ऐसी थी कि यह सुबह 6 बजे उठ जाता था, फिर नाश्ता करता और पूरा काम बिल्कुल तय समय और नियमित दिनचर्या के अनुसार करता था. इसी वजह से मुझे भी कहीं जाना नहीं होता था, क्योंकि अगर इसका थोड़ा सा भी समय इधर-उधर हो जाता तो इसे दिक्कत होती."
मंजू अग्निहोत्री ने बताया कि अनुज पढ़ाई के दौरान बेहद अनुशासित रहता था और किसी भी तरह की बाधा उसे पसंद नहीं थी.
उन्होंने कहा,"यह बहुत कम लोगों से मिलता-जुलता था. यहां तक कि हम लोग आमने-सामने रहते हुए भी ज्यादा बातचीत नहीं करते थे. वह अपने कमरे में अलग बैठकर पढ़ाई करता था. हम लोग बस इतना ध्यान रखते थे कि उसे कोई भी परेशान न करे. इसलिए न मैं कहीं जाती थी और न ही घर पर किसी का ज्यादा आना-जाना होता था."
उन्होंने आगे कहा,"टॉप करने की बात तो पहले से नहीं कही जा सकती, क्योंकि इस परीक्षा में बहुत अनिश्चितता होती है. लेकिन इसकी मेहनत देखकर हमेशा लगता था, और मैं हमेशा कहती भी थी कि यह आगे चलकर जरूर कुछ बड़ा करेगा."
तीसरे प्रयास में हासिल की पहली रैंक
अनुज अग्निहोत्री ने बताया कि उनकी यह सफलता एक लंबी यात्रा का परिणाम है. उन्होंने कहा,"जब एमबीबीएस में अपना ग्रेजुएशन कर रहा था, उसी दौरान मेरा रुझान मेडिकल साइंस की जगह सिविल सेवाओं की ओर हो गया. तभी मैंने सोचा था कि मुझे सिविल सर्विस में जाना है. आगे 2023 में मेरा पहला प्रयास था, जिसमें मुझे DANICS सेवा मिली थी. यह मेरा तीसरा प्रयास है, इसलिए मेरी यह एक लंबी यात्रा रही है."
उन्होंने अपनी पढ़ाई के बारे में बताते हुए कहा,"मैंने 2017 बैच में AIIMS जोधपुर से एमबीबीएस किया है. जब मैं इंटर्नशिप कर रहा था, तब अपनी प्रैक्टिस के साथ-साथ तैयारी के लिए मैंने एक ऑनलाइन कोर्स लिया था. उसके बाद मैंने घर पर रहकर ही अपनी तैयारी जारी रखी."
परिवार का मिला मजबूत सहयोग
अनुज ने अपनी सफलता का बड़ा श्रेय अपने परिवार को दिया. उनका कहना है कि यूपीएससी जैसी लंबी तैयारी के दौरान परिवार का सहयोग बेहद जरूरी होता है.
उन्होंने कहा,"मैं मानता हूं कि इसमें मेरे परिवार का बहुत बड़ा योगदान है, क्योंकि उन्होंने हमेशा एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम बनाए रखा. यह एक लंबी यात्रा होती है, इसलिए स्वाभाविक है कि एक मजबूत सहारा बहुत जरूरी होता है. इसका पूरा श्रेय मैं अपने परिवार को देना चाहता हूं. मेरे पिताजी न्यूक्लियर पावर प्लांट में कर्मचारी हैं और माताजी गृहिणी हैं."
पहली रैंक को बताया मेहनत और भाग्य का परिणाम
अनुज अग्निहोत्री का कहना है कि यूपीएससी जैसी परीक्षा में पहली रैंक की उम्मीद पहले से तय नहीं की जा सकती. उन्होंने इसे मेहनत और भाग्य दोनों का परिणाम बताया.
उन्होंने कहा,"पहली रैंक की उम्मीद कोई भी पक्के तौर पर नहीं लगा सकता, क्योंकि यह ऐसा परीक्षा है जिसमें काफी विषयगतता होती है, इसलिए पहली रैंक कहीं न कहीं भाग्य की बात भी होती है. लेकिन जो भी अभ्यर्थी परीक्षा देता है, खासकर जब वह साक्षात्कार तक पहुंचता है, तो उसके मन में उम्मीद जरूर होती है."


