एक्शन में सुवेंदु सरकार! बंगाल में घुसपैठियों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन, बॉर्डर की तरफ भागे सैकड़ों बांग्लादेशी

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार के गठन के बाद अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ एक व्यापक और सख्त अभियान शुरू कर दिया गया है. प्रशासन स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है और ऐसे मामलों पर तेजी से कार्रवाई की जा रही है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी हो गई है.

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल में नई भारतीय जनता पार्टी सरकार के गठन के साथ ही अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ एक व्यापक और कड़ा अभियान शुरू हो चुका है. सरकार की नई 'डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट' (पहचान करो, नाम हटाओ, देश निकाला दो) रणनीति के जमीन पर उतरते ही पूरे राज्य में प्रशासनिक और सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी हलचल देखी जा रही है.

कड़े रुख का असर क्या हुआ

इस कड़े रुख का असर यह हुआ है कि राज्य के विभिन्न सीमावर्ती इलाकों से बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों ने खुद ही वापस अपने देश की ओर रुख करना शुरू कर दिया है.

बांग्लादेशी नागरिक छोड़ रहे भारत

मंगलवार को उत्तर 24 परगना जिले के बिथारी-हाकिमपुर बॉर्डर पर एक अभूतपूर्व स्थिति देखने को मिली जहां सैकड़ों की संख्या में बांग्लादेशी नागरिक बिना कानूनी दस्तावेजों के भारत से वापस जाने के लिए एकत्रित हो गए. स्वरूपनगर क्षेत्र के पास अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर बढ़ते इन पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने तुरंत हिरासत में ले लिया. इसके बाद बीएसएफ द्वारा कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करते हुए इन्हें 'बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश' को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की गई.

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की चेतावनी

पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कल्याणी में एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद इस मुद्दे पर बेहद आक्रामक और स्पष्ट रुख अपनाया. उन्होंने घुसपैठियों को खुली चेतावनी देते हुए कहा, जल्दी से जल्दी देश छोड़ दो अन्यथा प्रशासन नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है. मुख्यमंत्री ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि हिरासत में लिए गए सभी अवैध प्रवासियों को बिना किसी देरी के जल्द से जल्द बांग्लादेश वापस भेजा जाए.

सुरक्षा सख्ती से लागू

सुवेंदु अधिकारी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अवैध रूप से रह रहे लोगों को कोर्ट-कचहरी के लंबे चक्र में उलझाने की आवश्यकता नहीं है. उन्होंने कहा, पुलिस सीधे संदिग्धों को हिरासत में लेकर बीएसएफ के सुपुर्द कर सकती है. भारत और बांग्लादेश के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते के तहत, बीएसएफ इन नागरिकों की पहचान की पुष्टि करेगी और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करेगी. मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कानून हमेशा से अस्तित्व में था लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने राजनीतिक वोटबैंक के लालच में इसे कभी लागू नहीं होने दिया. अब इसे राज्य और राष्ट्र की सुरक्षा के हित में पूरी सख्ती से लागू किया जा रहा है.

खौफ से वापसी का माहौल

सरकार की इस अचानक और तीव्र कार्रवाई के कारण घुसपैठियों के बीच कानूनी कार्रवाई का डर साफ देखा जा सकता है. कई बांग्लादेशी नागरिकों ने होल्डिंग सेंटर्स की अनिश्चितता से बचने के लिए खुद ही वतन लौटने का फैसला किया है. मूल रूप से बांग्लादेश के खुलना की रहने वाली तक्लीमा खातून ने बताया कि वह लगभग दो साल पहले अवैध रूप से सीमा पार कर भारत आई थीं और यहां घरेलू सहायिका के रूप में काम कर रही थीं. उन्होंने कहा, मैं सरकार द्वारा बनाए गए होल्डिंग सेंटर में बंद नहीं होना चाहती, इसलिए मैं अपनी मर्जी से अपने घर लौट रही हूं.

मुर्शिदाबाद और मालदा में होल्डिंग सेंटर्स सक्रिय

इस रणनीति को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. सोमवार को मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों में दो बड़े होल्डिंग सेंटर्स की शुरुआत की गई है. इन सेंटर्स के सक्रिय होते ही पहले दिन ही विभिन्न क्षेत्रों से पकड़े गए 12 संदिग्ध बांग्लादेशी प्रवासियों को वहां स्थानांतरित कर दिया गया.

पूरा डिजिटल डेटाबेस तैयार

सीमा सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक पकड़े गए व्यक्तियों की गहन प्राथमिक पूछताछ की जाती है. इसके साथ ही उनके फिंगरप्रिंट और फोटोग्राफ का पूरा डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है. इस पूरी प्रामाणिक प्रक्रिया के बाद ही बीजीबी के अधिकारियों से संपर्क साधा जाता है ताकि दोनों देशों के प्रोटोकॉल के तहत उनकी पहचान सत्यापित कर उन्हें वापस भेजा जा सके. आने वाले दिनों में सीमावर्ती इलाकों में गश्त और संदिग्धों की धरपकड़ को और अधिक तेज करने की योजना है. First Updated : Wednesday, 27 May 2026