CM मान ने उठाई चुनाव प्रक्रिया पर सवाल की आवाज़, कहा जनता को पूछने का हक़, जवाब दे ECI
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चुनाव प्रक्रिया पर जनता द्वारा उठाए गए सवालों का समर्थन करते हुए कहा कि संदेह जताना जनता का लोकतांत्रिक अधिकार है और पारदर्शी जवाब देना चुनाव आयोग की ज़िम्मेदारी।

देश भर में चुनाव प्रक्रिया को लेकर चिंता बढ़ रही है। कई लोग मानते हैं कि उनकी आवाज़ पूरी तरह नहीं सुनी जा रही। पारदर्शिता और निष्पक्षता पर प्रश्न उठ रहे हैं। जब जनता विश्वास खोने लगे तो लोकतंत्र खतरे में आ जाता है। यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि गंभीर राष्ट्रीय चिंतन का विषय है। ऐसे समय में नेताओं को जनता के डर को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
क्या CM मान ने जनता की भावना को साहस से व्यक्त किया?
भगवंत मान ने कहा कि सवाल पूछना देश को कमजोर नहीं करता। उन्होंने बताया कि वोट डालने वाला नागरिक जवाब मांगने का पूरा अधिकार रखता है। लोगों के मन की बात उन्होंने स्पष्ट भाषा में कही। उन्होंने जनता को दोषी नहीं ठहराया बल्कि जिम्मेदारी संस्थाओं की बताई। उनका संदेश पंजाब से निकलकर पूरे देश में गूँज रहा है। लोकतंत्र जनता के भरोसे पर चलता है।
क्या जनता को नहीं, बल्कि ECI को जवाब देना चाहिए?
मुख्यमंत्री मान ने पूछा कि सबूत जनता क्यों दे? जवाब चुनाव आयोग को देना चाहिए। भरोसा चुप्पी से नहीं, स्पष्टता से आता है। संस्थाएं जनता की सेवा के लिए बनी हैं। अगर मतदाता चिंतित है तो अधिकारी को ही समाधान देना चाहिए। पारदर्शिता से विश्वास पैदा होता है और विश्वास से लोकतंत्र मजबूत होता है।
क्या सवाल उठाना लोकतंत्र को मजबूत करता है?
मान के अनुसार सवाल उठाना लोकतंत्र को बचाने का साधन है। ऐसे समय में चुप रहना अविश्वास को बढ़ाता है। जनता प्रक्रिया पर शक नहीं, बल्कि निष्पक्षता की गारंटी चाहती है। उनका बयान दुर्लभ राजनीतिक साहस दर्शाता है। उन्होंने प्रक्रिया से ऊपर नागरिक हित को रखा। यह बताता है कि लोकतंत्र में प्रश्न उठाना भागीदारी का हिस्सा है, विद्रोह नहीं।
क्या यह संदेश राष्ट्रीय बहस शुरू करेगा?
मान का बयान पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। लोगों को लगा कि उनकी सोच एक मुख्यमंत्री ने सामने रखी। कई नेता ऐसे बयान देने से बचते हैं। पर मान ने सरल और सीधी भाषा में बात कही। उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव किसी पार्टी का नहीं, जनता का अधिकार है। लोकतंत्र बिना सहभागिता और खुलापन अधूरा है।
क्या भरोसा चुप्पी से नहीं, पारदर्शिता से लौटेगा?
मुख्यमंत्री ने कहा कि वोटिंग लोगों में विश्वास पैदा करे, डर नहीं। जनता को राहत मिली जब उनकी चिंता को स्वीकार किया गया। उन्होंने न संदेह जताने वालों को रोका, न सवाल दबाए। बल्कि बताया कि संस्थाओं का कर्तव्य है स्पष्ट जवाब देना। सच्चाई से ही विश्वसनीयता आती है। चुप्पी कमजोर बनाती है और स्पष्टता मज़बूत।
क्या यह आवाज़ पंजाब से आगे पूरे भारत की है?
यह बयान केवल पंजाब की नहीं, बल्कि भारत की आवाज़ माना जा रहा है। मान ने दिखाया कि असली ताकत जनता के भरोसे में होती है, सत्ता की कुर्सी में नहीं। उन्होंने राजनीतिक सुविधा से पहले नागरिक अधिकार को प्राथमिकता दी। उनका संदेश नेतृत्व में ईमानदारी और जवाबदेही का उदाहरण है। यह आवाज़ नए विचारों और भरोसे की शुरुआत कर सकती है।


