भारत बंद आज, जानिए किसने बुलाई हड़ताल, क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद?
देशभर में आज ‘भारत बंद’ का आह्वान किया गया है. इस बंद के चलते कई राज्यों में सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है.

देशभर में आज ‘भारत बंद’ का आह्वान किया गया है, जिसके चलते कई राज्यों में सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है. इस बंद की घोषणा विभिन्न केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, किसान संगठनों और सामाजिक समूहों के संयुक्त मंच द्वारा की गई है.
संगठनों का क्या कहना है?
संगठनों का कहना है कि वे केंद्र सरकार की श्रम, कृषि और आर्थिक नीतियों के विरोध में यह राष्ट्रव्यापी हड़ताल कर रहे हैं. उनका आरोप है कि हाल के वर्षों में लागू किए गए कई सुधार मजदूरों और किसानों के हितों के प्रतिकूल हैं. यूनियनों का दावा है कि इस बार की हड़ताल में बड़ी संख्या में श्रमिक भाग ले सकते हैं. उनका अनुमान है कि करीब 30 करोड़ कामगार देशभर में बंद का समर्थन कर सकते हैं.
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर ने कहा कि पिछली बार जुलाई 2025 में हुए प्रदर्शन में लगभग 25 करोड़ लोगों ने हिस्सा लिया था, जबकि इस बार भागीदारी उससे भी अधिक हो सकती है. उनके अनुसार 600 से अधिक जिलों में बंद का असर देखने को मिल सकता है, जो पिछले वर्ष की तुलना में ज्यादा है.
किसने बुलाया बंद?
यह बंद दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा बुलाया गया है. इनमें AITUC, INTUC, CITU, HMS, TUCC, SEWA, AIUTUC, AICCTU, LPF और UTUC शामिल हैं. इनके अलावा संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), कृषि मजदूर संगठन, छात्र और युवा संगठन भी इस आंदोलन के समर्थन में सामने आए हैं.
हड़ताल का मुख्य मुद्दा चार नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड) का विरोध है. यूनियनों का तर्क है कि ये कानून नौकरी की सुरक्षा को कमजोर करते हैं और कर्मचारियों को हटाने की प्रक्रिया को आसान बनाते हैं. उनका कहना है कि इससे श्रमिकों की सौदेबाजी की ताकत घटेगी और सामाजिक सुरक्षा प्रावधान कमजोर पड़ेंगे. इसके अलावा वे मनरेगा (MGNREGA) को मजबूत करने, बजट बढ़ाने और ग्रामीण रोजगार गारंटी को प्रभावी बनाने की मांग कर रहे हैं.
अन्य प्रमुख मांगों में ड्राफ्ट सीड बिल और बिजली संशोधन विधेयक को वापस लेना, पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करना, नई शिक्षा नीति 2020 की समीक्षा या वापसी और सिविल सेवा से जुड़ी कुछ नीतियों में बदलाव शामिल हैं. संगठनों का कहना है कि ये सभी कदम आम लोगों विशेषकर ग्रामीण और श्रमिक वर्ग पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं.
संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत-अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते पर भी चिंता जताई है. मोर्चा के नेताओं का कहना है कि यदि विदेशी कृषि उत्पाद बड़े पैमाने पर भारतीय बाजार में आए तो घरेलू किसानों की आय प्रभावित हो सकती है. उनका आशंका है कि सस्ते आयात से स्थानीय उत्पादन पर दबाव बढ़ेगा.
क्या-क्या हो सकता है प्रभावित?
बंद के चलते सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, बीमा कार्यालय, राज्य परिवहन सेवाएं, सरकारी दफ्तर, सार्वजनिक उपक्रम (PSU), औद्योगिक इकाइयां और कोयला-इस्पात जैसे क्षेत्रों में कामकाज प्रभावित हो सकता है. विशेष रूप से केरल और ओडिशा जैसे राज्यों में असर अधिक होने की संभावना जताई जा रही है, जहां ट्रेड यूनियनों की पकड़ मजबूत मानी जाती है. कुछ स्थानों पर मनरेगा के तहत चल रहे कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं.
हालांकि, आवश्यक सेवाओं को बंद से अलग रखने की बात कही गई है. अस्पताल, एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होने की उम्मीद है. मेट्रो सेवाएं, ट्रेनें, निजी दफ्तर, आईटी कंपनियां और अधिकांश शैक्षणिक संस्थान खुले रह सकते हैं. हालांकि, स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर स्थिति बदल सकती है.
सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें. कुल मिलाकर, 12 फरवरी का भारत बंद कई जगहों पर जनजीवन की रफ्तार धीमी कर सकता है और आम लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है.


