बिहार में खुले में मांस-मछली बेचने पर रोक, अवैध दुकानें होंगी बंद...सरकार का इरादा केवल साफ-सफाई या कुछ और ?

बिहार सरकार ने खुले में मांस-मछली की बिक्री करने पर रोक लगाने का फैसला किया है. सरकार का इस फैसले के पीछे उद्देश्य है कि शहरों को स्वच्छ बनाया जाए और राज्य में साफ-सफाई को बढ़ावा दिया जाए. इसके साथ ही बच्चों में हिंसक प्रवृत्तियों को रोकने के लिए ऐसा किया जा रहा है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

पटना : बिहार सरकार ने हाल ही में शहरों में बिना लाइसेंस वाली और सड़क किनारे मांस-मछली की दुकानों पर प्रतिबंध की घोषणा की. उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विधान परिषद में इसे शहरों की सफाई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. रविवार को उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूलों, धार्मिक स्थलों और भीड़ वाली जगहों के पास खुले में बिक्री नहीं होगी. सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक सद्भाव और बच्चों में हिंसा रोकने के लिए यह फैसला लिया गया है. हालांकि, शराबबंदी जैसे पुराने आदेशों का पालन न होने से इसकी सफलता पर सवाल उठ रहे हैं. 

मांस-मछली खाने पर कोई रोक नहीं...

आपको बता दें कि केवल आदेश जारी करने से अगर शहरों की सफाई में सुधार आ सकता है, तो यह कदम स्वागतयोग्य है. लेकिन बिहार के इतिहास को देखें तो यह मुश्किल लगता है. जहां शराब पर रोक के बावजूद अवैध शराब की खपत सबसे ज्यादा है, वहां कानूनों का पालन कैसे होगा, यह सोचने वाली बात है. इस नए प्रतिबंध का कितना असर पड़ेगा, इसमें शक है. सरकार साफ कह रही है कि मांस-मछली खाने पर कोई रोक नहीं, सिर्फ बिक्री के तरीके पर. 

बिक्री लाइसेंस वाली दुकानों तक सीमित

बिहार में गैर-शाकाहारी भोजन आम है, जहां हर साल लगभग 4.2 लाख टन मांस और 9.59 लाख टन से अधिक मछली पैदा होती है. प्रतिबंध सिर्फ शहरों में बिना लाइसेंस वाली सड़क किनारे, बाजारों या सार्वजनिक रास्तों पर बिक्री पर है. अब बिक्री केवल लाइसेंस वाली दुकानों तक सीमित रहेगी, जहां सफाई के नियम जैसे कचरा निपटान अनिवार्य हैं. दुकानों में पर्दे या कांच लगाने होंगे ताकि मांस दिखाई न दे. 

विक्रेताओं की चुनौतियां

बिना लाइसेंस वाले दुकानदारों के लिए नगर निकाय से अनुमति लेना सबसे बड़ी समस्या होगी. मौजूदा लाइसेंसधारियों को बूचड़खानों या तय बाजारों में शिफ्ट किया जा सकता है, लेकिन कोई नहीं जाना चाहता क्योंकि वहां ग्राहक कम आते हैं. बूचड़खानों की हालत भी खराब है, जिन्हें सुधारने में प्रशासन को मुश्किल आएगी. कई शहरों में ऐसे स्थान बचे ही नहीं हैं

उल्लंघन पर 2007 के कानून के तहत जुर्माना

उल्लंघन पर बिहार नगरपालिका कानून 2007 के तहत जुर्माना, सामान जब्ती और दुकान बंद करने की सजा मिलेगी. अधिकारियों को सभी दुकानों की जांच और लाइसेंस जांचने के आदेश हैं. इससे मांस बिक्री पर निगरानी बढ़ेगी. उत्तर प्रदेश में 2017 में योगी सरकार ने ऐसा ही किया था, शुरू में सख्ती हुई लेकिन राजनीति, भ्रष्टाचार और संसाधन कमी से सब पुरानी स्थिति पर लौट गया. बिहार में भी यही हो सकता है, जहां लागू करना और कठिन है. 

किसी समुदाय को निशाना नहीं बनाया जा रहा 

सरकार कहती है कि यह किसी समुदाय को निशाना नहीं बना रहा, लेकिन रमजान में बिक्री प्रभावित होगी तो एक वर्ग को तकलीफ होगी. आरजेडी के मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि नीतीश कमजोर हो रहे हैं और भाजपा अपना एजेंडा चुपके से लागू कर रही है. पहले से खुले में बिक्री पर रोक है, लेकिन भाजपा इसे धार्मिक रंग दे रही है. ज्यादातर विक्रेता गरीब हैं, रोज कमाकर गुजारा करते हैं. मल्लाह जैसे पिछड़े समुदाय के लोग मछली बेचते हैं, कई टोकरी लेकर घूमते हैं. लाइसेंस कैसे लें, उन्हें पता नहीं. कुछ दिन काम बंद होगा. हैरानी है कि कई मछली विक्रेता भाजपा समर्थक हैं. summry in 80 words in hindi and not plagarism in hindi and also 25 google seo keywords in english in paragraph

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