व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने वाला नौगाम पुलिस स्टेशन धमाके से मलबे में हुआ तब्दील
नौगाम पुलिस स्टेशन में शुक्रवार रात एक बड़ा धमाका हुआ, जिसमें कम से कम 9 लोगों की मौत व कई लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है. जिस पुलिस स्टेशन में यह हादसा हुआ है, वहीं की पुलिस टीम ने व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था.

नई दिल्ली: नौगाम पुलिस स्टेशन में शुक्रवार रात एक बड़ा धमाका हुआ, जिसमें कम से कम 9 लोगों की मौत व कई लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है. जिस पुलिस स्टेशन में यह हादसा हुआ है, वहीं की पुलिस टीम ने व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था. नौगाम पुलिस स्टेशन में ही व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल मामले में पहली एफआईर दर्ज हुई थी, जिसके बाद देश में अलग-अलग जगहों पर कार्रवाई शुरू हुई.
व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का खुलासा
रिपोर्ट के अनुसार, नौगाम पुलिस स्टेशन ने श्रीनगर में आतंकी संगठन जैश से जुड़े पोस्टर पकड़े थे, जिसके बाद व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का खुलासा हुआ था. नौगाम पुलिस थाना इस पूरी जांच के केंद्र में था. अब इस पुलिस स्टेशन में जांच के लिए लाए विस्फोटक में हुए धमाके ने हैरान कर दिया है. इस मामले की अलग-अलग एंगल से जांच की जा रही है.
कब हुआ धमाका
आपको बता दें कि धमाका उस समय हुआ जब अधिकारी हरियाणा के फरीदाबाद से बरामद किए गए भारी मात्रा में विस्फोटकों के नमूने निकाल रहे थे. ये वही सामग्री थी जिसे हाल ही में ‘व्हाइट-कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल की जांच के दौरान पकड़ा गया था. हालांकि विस्फोट कैसे हुआ, इसकी औपचारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है.
📍Tragic visuals emerge from the Nowgam police station in J&K where an explosion has claimed at least 9 lives 💔https://t.co/G2NCtlgCmV
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) November 15, 2025
परिसर में भारी नुकसान, रास्ते बंद
धमाके की तीव्रता इतनी ज़्यादा थी कि पुलिस स्टेशन के भीतर खड़ी कई गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त हो गईं. घटना के तुरंत बाद कई दमकल गाड़ियाँ मौके पर भेजी गईं. सुरक्षा कारणों से पुलिस स्टेशन की ओर जाने वाली सभी सड़कों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया.
2,900 किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद
कुछ दिनों पहले ही सुरक्षा एजेंसियों ने फरीदाबाद के धौज और फतेहपुर टैगा क्षेत्रों में स्थित दो किराए के कमरों से करीब 2,900 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट और अन्य विस्फोटक सामग्री जब्त की थी. यह कमरा पुलवामा के रहने वाले डॉ. मुअज्जमिल शकील के नाम पर किराए पर लिया गया था, जो अल-फला मेडिकल कॉलेज में पढ़ाते थे.
पोस्टरों से शुरू हुआ सुराग, डॉक्टरों की तिकड़ी पर शक
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीर में लगे कुछ उग्रवादी पोस्टरों की जांच से शुरू हुई यह कहानी मुअज्जमिल की गिरफ्तारी तक पहुंची. उससे हुई पूछताछ ने जांच टीम को फारिदाबाद में सक्रिय उस मॉड्यूल तक पहुंचाया, जहाँ से विस्फोटक सामग्री मिली. जांचकर्ताओं का मानना है कि यह पूरा नेटवर्क तीन डॉक्टरों डॉ. मुअज्जमिल शकील गनई, उमर नबी (जो 10 नवंबर को लाल किले के पास विस्फोटक से भरी कार चलाने वाला बताया जाता है), और मुज़फ्फर राथर (जो फिलहाल फरार है) की कोर टीम द्वारा संचालित किया जा रहा था.


