आसमान में भारत का नया योद्धा! CATS Warrior ने बढ़ाई चीन-पाक की टेंशन
कैट्स वॉरियर का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जब फाइटर जेट दुश्मन की हवाई सीमा में प्रवेश करे, तो पायलट पूरी तरह सुरक्षित रहे.

भारत अब ड्रोन युद्धक्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाने की ओर बढ़ रहा है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विकसित किया गया 'कैट्स वॉरियर' नामक एक उन्नत कॉम्बैट ड्रोन आने वाले समय में भारतीय वायुसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा सकता है. रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग ने हाल ही में इस अत्याधुनिक ड्रोन की जानकारी साझा की है.
लॉयल विंगमैन
फरवरी 2025 में बेंगलुरु में हुए एयरो इंडिया शो में इस ड्रोन का मॉडल पहली बार प्रस्तुत किया गया था. कैट्स वॉरियर एक स्टेल्थ कॉम्बैट यूएवी है, जिसे हल्के लड़ाकू विमान तेजस के साथ उड़ने के लिए डिजाइन किया गया है. यह ड्रोन, जिसे 'लॉयल विंगमैन' भी कहा जाता है, युद्ध के दौरान लड़ाकू विमान से पहले उड़कर दुश्मन की स्थिति की जानकारी देता है और ज़रूरत पड़ने पर खुद खतरे में जाकर हमला भी कर सकता है.
इस ड्रोन की खासियत यह है कि इसे फाइटर जेट से ही कंट्रोल किया जा सकता है. यह दुश्मन की सीमा में घुसकर बम या मिसाइल से हमला कर सकता है, जिससे फाइटर पायलट की जान जोखिम में नहीं पड़ती. इसका इस्तेमाल हाई-रिस्क मिशनों में किया जा सकता है, जहां मानव जीवन को बचाना प्राथमिकता होती है.
कैट्स वॉरियर
कैट्स वॉरियर में दो एयर-टू-एयर और दो स्मार्ट एयर-टू-ग्राउंड वेपन्स लगाए जा सकते हैं. यह 9000 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है और 300 किलोमीटर के दायरे में लक्ष्य पर सटीक वार करने की क्षमता रखता है. इसका वजन करीब 2 टन है.
इस तकनीक का महत्व हालिया ऑपरेशन सिंदूर और 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक जैसी घटनाओं से समझा जा सकता है, जहां पायलटों को दुश्मन की हवाई सीमा में जाकर जोखिम उठाना पड़ा था. कैट्स वॉरियर जैसे ड्रोन इस खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं.


