गर्भवती होने का दावा कर कोर्ट पहुंचीं निदा खान, जमानत की गुहार
नासिक के टीसीएस धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न मामले में फरार आरोपी निदा खान ने अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल करते हुए खुद के गर्भवती होने का दावा किया है. इस बीच एसआईटी की जांच जारी है और पुलिस उनके दावों की पुष्टि में जुटी है.

नई दिल्ली: नासिक स्थित टीसीएस यूनिट में कथित जबरन धर्म परिवर्तन और यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी निदा खान से जुड़ी एक नई जानकारी सामने आई है. फरार चल रही खान ने अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की है और अपनी गर्भावस्था का हवाला देते हुए राहत की मांग की है.
सूत्रों के मुताबिक, निदा खान इस समय मुंबई में हैं और उनके परिवार का दावा है कि वह अपने पहले बच्चे की उम्मीद कर रही हैं. इस बीच, विशेष जांच दल (SIT) लगातार उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश में जुटा हुआ है.
अग्रिम जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया
25 वर्षीय निदा खान ने नासिक की एक स्थानीय अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है. बताया जा रहा है कि उन्होंने अपनी मेडिकल स्थिति को अपने आवेदन में एक अहम आधार बनाया है.
अधिकारियों का कहना है कि इन दावों की पुष्टि आधिकारिक मेडिकल प्रक्रिया के जरिए की जाएगी.
2021 से टीसीएस में कर रही थीं काम
निदा खान ने वर्ष 2021 में नासिक स्थित टीसीएस की बीपीओ यूनिट में काम शुरू किया था. फिलहाल वह मामले के सामने आने के बाद से फरार बताई जा रही हैं.
धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के आरोप
पुलिस इस मामले में जबरन धर्म परिवर्तन और यौन उत्पीड़न से जुड़ी कुल नौ शिकायतों की जांच कर रही है.
इन शिकायतों के आधार पर अब तक छह पुरुषों और एक महिला मानव संसाधन प्रमुख समेत सात कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
SIT कर रही है जांच
पिछले सप्ताह पुलिस ने आठ महिला कर्मचारियों की शिकायतों के बाद एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था.
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उनके वरिष्ठ सहकर्मियों ने उनका मानसिक और यौन उत्पीड़न किया और मानव संसाधन विभाग ने उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया. ये घटनाएं फरवरी 2022 से मार्च 2026 के बीच की बताई जा रही हैं.
गंभीर आरोपों का खुलासा
जांच में सामने आया है कि एक आरोपी ने शादी का झूठा वादा कर एक महिला कर्मचारी के साथ बार-बार शारीरिक संबंध बनाए.
इसके अलावा, एक कर्मचारी के साथ अनुचित व्यवहार और उसके निजी जीवन पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के भी आरोप हैं.
पुलिस ने अपने बयान में कहा, "जब शिकायतकर्ता ने इन घटनाओं के संबंध में कंपनी के प्रमुख अधिकारी के समक्ष बार-बार मौखिक शिकायतें दर्ज कराईं, तो उन्होंने छेड़छाड़ संबंधी उसकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया; बल्कि, उन्होंने प्रभावी रूप से उनके कृत्यों को बढ़ावा दिया."
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने एक पुरुष कर्मचारी को नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया और उसके धर्म का अपमान किया.
गिरफ्तार कर्मचारियों की पहचान
इस मामले में गिरफ्तार कर्मचारियों की पहचान दानिश शेख, तौसीफ अत्तार, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख, आसिफ आफताब अंसारी और मानव संसाधन प्रमुख अश्विनी चैनानी के रूप में हुई है. सभी को निलंबित कर दिया गया है.
टीसीएस का बयान: ‘शून्य-सहनशीलता’ की नीति
टीसीएस ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि कंपनी की उत्पीड़न के प्रति 'शून्य-सहिष्णुता' नीति है और वह पुलिस के साथ पूरा सहयोग कर रही है.
कंपनी ने बयान में कहा, "टीसीएस की किसी भी प्रकार के उत्पीड़न और दबाव के प्रति लंबे समय से शून्य-सहिष्णुता नीति रही है. हमने कार्यस्थल पर अपने कर्मचारियों की सुरक्षा और कल्याण के उच्चतम मानकों को हमेशा सुनिश्चित किया है,"
साथ ही, "नासिक में इस मामले की जानकारी मिलते ही हमने तुरंत कार्रवाई की."
जांच के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई
कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि जिन कर्मचारियों के खिलाफ जांच चल रही है, उन्हें निलंबित कर दिया गया है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्ष के आधार पर की जाएगी.
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा, "इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया जा रहा है. आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है और कंपनी चल रही जांच में पूरा सहयोग दे रही है."
उन्होंने यौन उत्पीड़न के आरोपों को "बेहद चिंताजनक और पीड़ादायक" भी बताया और कहा कि टीसीएस की मुख्य परिचालन अधिकारी आरती सुब्रमणियन के नेतृत्व में गहन जांच जारी है.


