गधे पालने से होगी मोटी कमाई, सरकार दे रही 50 लाख रुपये...जानें कैसे करें आवेदन

देश में गधों की संख्या तेजी से घटती जा रही है, इसलिए केंद्र सरकार ने इनके संरक्षण के लिए बड़ा कदम उठाया है. केंद्र ने गधे को राष्ट्रीय पशुधन मिशन NLM योजना में शामिल करते हुए 50 लाख रुपये तक की आर्थक सहायता देने की घोषणा की है. साल 2012 से अब तक गधों की संख्या में 60 फीसदी तक की कमी आई है. इसी कमी को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने इस योजना की शुरुआत की है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने गधे, घोड़े और ऊंट जैसे पारंपरिक पशुओं की घटती संख्या को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय पशुधन मिशन NLM योजना में शामिल किया है, जिसके तहत पालन करने वालों को भारी आर्थिक सहायता मिल रही है. यह योजना 2021-22 से संशोधित रूप में चल रही है और इसका मुख्य लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, नस्ल सुधार और उत्पादकता बढ़ाना है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2019 की 20वीं पशुगणना में देश में कुल गधों की संख्या मात्र 1.23 लाख (लगभग 1.22 लाख) रह गई थी, जो 2012 से करीब 61 प्रतिशत कम है.

क्या है कमी का मुख्या कारण

इसी तरह घोड़े-खच्चर और ऊंटों की संख्या में भी तेज गिरावट आई है. इनकी कमी का मुख्य कारण अब इनका पारंपरिक काम जैसे बोझ ढोना, ईंट-रेत ट्रांसपोर्ट आदि में कम इस्तेमाल होना है. सरकार इनकी नस्लों को बचाने और लोगों को पालन के लिए प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रावधान कर रही है.

50 लाख रुपये तक सब्सिडी दे रही केंद्र सरकार 

आपको बता दें कि NLM योजना के उद्यमिता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत व्यक्ति, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), संयुक्त दायित्व समूह (जेएलजी), किसान सहकारी संगठन (एफसीओ) और धारा 8 कंपनियां गधा, घोड़ा या ऊंट प्रजनन फार्म स्थापित करने के लिए आवेदन कर सकती हैं. केंद्र सरकार परियोजना की कुल लागत का 50 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी देती है, जिसकी अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये तक है.


उदाहरण के लिए, गधों के लिए न्यूनतम यूनिट 50 मादा + 5 नर होती है, जबकि घोड़ों के लिए 10 मादा + 2 नर. ऊंटों के लिए यूनिट साइज के आधार पर 3 लाख से 50 लाख तक सब्सिडी मिल सकती है. यह सब्सिडी केवल स्वदेशी नस्लों के लिए उपलब्ध है, विदेशी नस्लों पर नहीं. सब्सिडी दो किस्तों में जारी की जाती है—पहली बैंक लोन मिलने पर और दूसरी प्रोजेक्ट पूरा होने पर.

इन राज्यों में है सबसे ज्यादा संख्या 

राज्यों को भी नस्ल संरक्षण के लिए सहायता मिलती है, जैसे वीर्य स्टेशन या न्यूक्लियस प्रजनन फार्म स्थापित करने पर 10 करोड़ रुपये तक की मदद. गधी के दूध को फूड प्रोडक्ट के रूप में मान्यता दिलाने के प्रयास चल रहे हैं, क्योंकि इसमें औषधीय गुण माने जाते हैं. FSSAI से इसे फूड आइटम में शामिल करने की मांग की गई है. गधों की संख्या सबसे ज्यादा राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में है, जबकि कई राज्यों में यह मात्र 2 से 10 तक सिमट गई है. कुल 28 राज्यों में ही गधे पाए जाते हैं.

कैसे करें आवेदन ?

इस योजना का लाभ उठाने के लिए आधिकारिक पोर्टल nlm.udyamimitra.in पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है. पूरी प्रक्रिया डिजिटल है, जिसमें बैंक लोन के साथ सब्सिडी सीधे लाभार्थी के खाते में आती है. यह प्रयास असंगठित क्षेत्र को संगठित बनाने, स्वदेशी नस्लों को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का है, जिससे किसानों को नई आय का स्रोत मिल सके.

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