रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है. जो 8 जुलाई से शुरू होकर 14 जुलाई 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 3:30 बजे से जारी रहेगा. कथा के तीसरे दिन शनिवार को पंडाल में सनातन संस्कारों, निस्वार्थ सेवा और जीवन दर्शन पर गंभीर चर्चा हुई. इस दौरान राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने भी कथा स्थल पर पहुंचकर व्यासपीठ का आशीर्वाद लिया और भगवान के दिव्य प्रसंगों का श्रवण किया.
‘नो तिलक, नो एंट्री’ का अनूठा नियम
आयोजन समिति के प्रमुख योगेश अग्रवाल ने बताया कि इस धार्मिक समागम में सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक विशेष और कड़ा नियम लागू किया गया है. कथा स्थल पर प्रवेश के लिए 'नो तिलक, नो एंट्री' की व्यवस्था रखी गई है. जिसका श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा, आस्था और कड़े अनुशासन के साथ पालन किया. पंडाल में आने वाले हर भक्त के मस्तक पर तिलक लगाया जा रहा है. जिसे देवकीनंदन ठाकुर ने नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम बताया.
पद-प्रतिष्ठा से बड़ी है निस्वार्थ सेवा
कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि संसार में किसी व्यक्ति को मिलने वाला पद और प्रतिष्ठा अस्थाई हैं, जबकि निस्वार्थ भाव से की गई सेवा ही इंसान की सबसे बड़ी और स्थाई पहचान बनती है. उन्होंने कहा कि ईश्वर यदि किसी व्यक्ति को समाज में कोई ऊंचा पद या अधिकार देता है, तो उसका उपयोग सत्ता के अहंकार के लिए नहीं, बल्कि समाज के वंचित और जरूरतमंद लोगों के कल्याण के लिए होना चाहिए.
देवकीनंदन ठाकुर की भागवत कथा
महाराज ने कथा में भक्त ध्रुव और राजा बलि के पौराणिक प्रसंगों को सुनाते हुए समझाया कि भगवान की भक्ति और सत्संग के लिए मनुष्य को बुढ़ापे या किसी खास उम्र का इंतजार नहीं करना चाहिए. जीवन के शुरुआती दौर यानी बचपन से ही बच्चों को ईश्वरीय नाम, सत्संग और सेवा भावना से जोड़ना जरूरी है.
अच्छे-बुरे कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि संसार में अहंकार का अंत हमेशा तय होता है और हर मनुष्य को अपने अच्छे-बुरे कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है. हर व्यक्ति को अपने जीवन में सत्य, दया, करुणा और सदाचार का मार्ग अपनाना चाहिए. उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि आज लोग मनोरंजन के लिए तो आसानी से वक्त निकाल लेते हैं. लेकिन भगवान की भक्ति में देरी से पहुंचते हैं. First Updated : Sunday, 12 July 2026