नशे की हालत में मंडप में पहुंचा दूल्हा, दुल्हन ने वापस लौटाई बारात, फिर जो हुआ?

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक दुल्हन ने अपनी ही बारात वापस लुटा दी. यह घटना कोसमंदा गांव की बताई जा रही है. क्या है पूरा मामला चलिए जानते है.

Yashika Jandwani

रायपुर: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक दुल्हन ने शादी के मंडप में ही बड़ा फैसला लेते हुए नशे में पहुंचे दूल्हे से विवाह करने से इनकार कर दिया. वहीं दुल्हन के इस फैसले का उसके परिवार ने भी पूरा समर्थन किया, जिसके बाद बारात बिना दुल्हन के ही वापस लौट गई. खास बात ये रही की इस फैसले के बाद पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय में दुल्हन और उसके परिवार को सम्मानित किया गया. क्या है पूरा मामला चलिए जानते है. 

शराब के नशे मं शादी करने पहुंचा दूल्हा

यह घटना कोसमंदा गांव की बताई जा रही है. शादी की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं और मेहमानों की मौजूदगी में विवाह की रस्में चल रही थीं. इसी दौरान परिजनों और मौजूद लोगों को पता चला कि दूल्हा शराब के नशे में है. शादी में मौजूद लोगों के अनुसार, उसकी हालत ऐसी थी कि वह ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था.

लड़की ने उठाया ये बड़ा कदम 

दूल्हे की स्थिति देखकर दुल्हन ने तुरंत विरोध जताया और साफ शब्दों में कहा कि वह ऐसे व्यक्ति के साथ अपना जीवन नहीं बिताना चाहती, जो शादी जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर भी नशे में पहुंचे. बेटी के इस निर्णय पर परिवार ने सामाजिक दबाव की परवाह किए बिना उसका साथ दिया और विवाह की रस्में रोक दीं.

हालांकि शादी रुकने के बाद कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया. लेकिन सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराया गया, जिसके बाद बिना किसी बड़े विवाद के बारात वापस लौट गई.

दुल्हन को किया गया सम्मानित 

इस घटना की चर्चा पूरे क्षेत्र में होने लगी. इसके बाद कई लोगों ने दुल्हन के फैसले को आत्मसम्मान, जागरूकता और महिलाओं के अधिकारों से जोड़ते हुए उसकी सराहना की है. मामले की जानकारी मिलने पर जांजगीर-चांपा के एसपी विजय कुमार पांडेय ने दुल्हन और उसके परिवार को अपने कार्यालय बुलाकर सम्मानित किया.

एसपी ने शादी को बताया पवित्र अवसर 

एसपी ने कहा कि शादी जैसे पवित्र अवसर पर नशे की कोई जगह नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हर बेटी को अपने जीवन और भविष्य से जुड़े फैसले लेने का पूरा अधिकार है और किसी भी तरह के सामाजिक दबाव में निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए. उनके अनुसार, दुल्हन का यह साहसिक कदम समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है और दूसरी बेटियों को भी अपने सम्मान और अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा देता है.

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