CM YOGI ऐसे ही 'फायर' नहीं कहे जाते, दिल्ली में भी चला 'बुल्डोजर'! 14 सीटों पर की रैली 11 पर मिली जीत

सीएम योगी ने दिल्ली चुनाव में जमकर रैलियां की थीं. उन्होंने मंगोलपुरी, जेजे कालोनी के शिव विहार, इंद्रपुरी के बुद्ध नगर, किराड़ी, करोल बाग, जनकपुरी, घोंडा, शाहदरा, उत्तम नगर, द्वारका, बिजवासन, पालम, राजेंद्र नगर, पटपड़गंज, सुलतानपुर और देवनगर जैसे प्रमुख इलाकों में प्रचार किया था.

Kamal Kumar Mishra

CM Yogi in Delhi Election: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर अपनी 'फायर ब्रांड' छवि को साबित किया है. उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव में के दौरान जिन 14 सीटों में रैली की उनमें से 11 सीटों पर जीत बीजेपी को जीत मिली है. यह सफलता उनके नेतृत्व में बीजेपी के लिए एक और बड़ी जीत साबित हुई है, जो यह दर्शाती है कि उनकी लोकप्रियता सिर्फ उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी वह प्रभावशाली नेता के तौर पर उभरे हैं.

सीएम योगी ने दिल्ली चुनाव में जमकर रैलियां की थीं. उन्होंने मंगोलपुरी, जेजे कालोनी के शिव विहार, इंद्रपुरी के बुद्ध नगर, किराड़ी, करोल बाग, जनकपुरी, घोंडा, शाहदरा, उत्तम नगर, द्वारका, बिजवासन, पालम, राजेंद्र नगर, पटपड़गंज, सुलतानपुर और देवनगर जैसे प्रमुख इलाकों में प्रचार किया था. इन रैलियों में उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) पर तीखे हमले किए और दिल्ली की जनता को बीजेपी के पक्ष में मतदान करने के लिए प्रेरित किया.

11 सीटों पर बीजेपी उम्मीदवारों की जीत

अब दिल्ली चुनाव के परिणामों के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि उनकी मेहनत रंग लाई. जिन 14 विधानसभा क्षेत्रों में सीएम योगी ने प्रचार किया, उनमें से 11 सीटों पर बीजेपी ने शानदार जीत दर्ज की. मंगोलपुरी सीट पर बीजेपी के उम्मीदवार राज कुमार चौहान ने जीत हासिल की, वहीं जनकपुरी सीट पर आशीष सूद और घोंडा पर अजय महावर ने बीजेपी के लिए विजय हासिल की. शाहदरा, उत्तम नगर, द्वारका, बिजवासन, पालम, राजेंद्र नगर और पटपड़गंज जैसी सीटों पर भी बीजेपी की जीत ने सीएम योगी की चुनावी रणनीति की सफलता को साबित किया.

इन तीन सीटों पर नहीं मिली जीत

हालांकि, तीन सीटों पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा- सुलतानपुर, किराड़ी और करोल बाग. इन परिणामों के बावजूद, कुल मिलाकर सीएम योगी का प्रचार और नेतृत्व बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हुआ. उनकी इन जीतों ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि वह केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी एक ताकतवर चुनावी नेता के रूप में उभर चुके हैं.

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