नई दिल्ली: मंगलवार (21 अप्रैल 2026) को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में अपने सरकारी आवास से विधानसभा तक 'जन आक्रोश महिला पदयात्रा' की अगुवाई की। यह मार्च लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, संशोधन बिल पास न हो पाने के विरोध में निकाला गया। इस दौरान सीएम योगी के साथ कई कैबिनेट मंत्री, BJP के वरिष्ठ नेता और हजारों की संख्या में महिला कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
आपको बताते चलें कि मार्च शुरू करने से पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि महिलाओं के नेतृत्व में निकाली जा रही यह पदयात्रा, कांग्रेस, SP, TMC और DMK के महिला-विरोधी रवैये के खिलाफ है। उन्होंने कहा, "आज आम जनता में, खासकर महिलाओं में गुस्सा है। हज़ारों महिलाएं इस विरोध मार्च का हिस्सा बनने के लिए आई हैं।"
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभा में कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का रवैया लोकतंत्र विरोधी है। इन दोनों दलों की सोच महिलाओं के खिलाफ है, और इसी वजह से आज पूरे देश में आधी आबादी उनके महिला-विरोधी रवैये का विरोध कर रही है। CM योगी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा कहते हैं कि देश में सिर्फ चार जातियां हैं- महिला, गरीब, युवा और किसान। सरकार की सारी योजनाएं और नीतियां इन्हीं चार वर्गों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं।
महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़ा यह बिल लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई समर्थन नहीं जुटा पाया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और DMK समेत प्रमुख विपक्षी दलों ने इसके खिलाफ वोट किया। जिसके चलते प्रस्ताव गिर गया। BJP इसे महिलाओं के हक की लड़ाई में बड़ा झटका बता रही है।
गौरतलब है कि इस पूरे मामले को लेकर BJP नेताओं का कहना है कि संशोधन बिल महिला आरक्षण को और मजबूत करता, लेकिन विपक्षी दलों ने राजनीति के चलते इसे गिरा दिया। पदयात्रा के जरिए पार्टी ने संदेश दिया कि वह महिलाओं के अधिकार के मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी और संसद से सड़क तक लड़ाई जारी रखेगी। लखनऊ में हुए इस मार्च के दौरान महिला समर्थकों ने विपक्ष के खिलाफ नारेबाजी की और आरक्षण बिल को जल्द पास कराने की मांग उठाई। First Updated : Tuesday, 21 April 2026