रूस की खुफिया जानकारी से खुली साजिश, NIA ने 7 विदेशियों को किया गिरफ्तार
NIA ने छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है, जिन पर म्यांमार में सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण और ड्रोन सप्लाई का आरोप है. मामले में अंतरराष्ट्रीय साजिश और सुरक्षा खतरे की जांच जारी है.

नई दिल्ली: भारत में हाल ही में सामने आए एक अंतरराष्ट्रीय जांच मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी और म्यांमार से जुड़े कथित संबंधों ने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया है. इस पूरे घटनाक्रम में रूस, यूक्रेन, अमेरिका और भारत जैसे कई देशों के नाम जुड़ने से मामला और भी गंभीर हो गया है.
सूत्रों के अनुसार, रूसी अधिकारियों ने भारत की एजेंसियों के साथ कुछ अहम जानकारियां साझा की थीं. इसी जानकारी के आधार पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कार्रवाई करते हुए छह यूक्रेनी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया. इन पर आरोप है कि वे म्यांमार में सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण दे रहे थे.
भारत कैसे पहुंचे आरोपी?
जांच में सामने आया है कि सभी आरोपी अलग-अलग समय पर पर्यटक वीजा पर भारत आए थे. इसके बाद वे गुवाहाटी पहुंचे और फिर बिना जरूरी परमिट के मिजोरम की ओर चले गए. आरोप है कि वहां से उन्होंने अवैध तरीके से म्यांमार में प्रवेश किया. भारतीय एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन विदेशी नागरिकों की यात्रा में किसने मदद की और क्या इस नेटवर्क में और लोग भी शामिल हैं.
म्यांमार में गतिविधियों का शक
जांच एजेंसियों को संदेह है कि ये लोग 2024 से म्यांमार के कई दौरे कर चुके थे. वहां वे ड्रोन, जैमिंग उपकरण और अन्य तकनीकी संसाधनों की सप्लाई कर रहे थे. साथ ही, स्थानीय सशस्त्र समूहों को आधुनिक युद्ध तकनीकों का प्रशिक्षण भी दे रहे थे. बताया जा रहा है कि इस पूरे समूह में कुल 14 लोग शामिल थे, जिनमें से सात को भारत में गिरफ्तार किया गया है. बाकी लोगों की तलाश अभी जारी है.
अदालत में पेशी और हिरासत
गिरफ्तार सभी सात आरोपियों को 13 मार्च को दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता के हवाई अड्डों से पकड़ा गया. इसके बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 27 मार्च तक NIA की हिरासत में भेज दिया गया.
यूक्रेन और अमेरिका की प्रतिक्रिया
यूक्रेन ने इस मामले में पारदर्शिता की मांग की है. वहां के राजदूत ने कहा है कि उनके नागरिकों के खिलाफ जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर यूक्रेनी विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाए. वहीं, अमेरिकी दूतावास ने केवल इतना कहा है कि उन्हें इस मामले की जानकारी है, लेकिन उन्होंने इस पर ज्यादा टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.
कानूनी प्रक्रिया पर उठे सवाल
सूत्रों के मुताबिक, यूक्रेनी पक्ष को इस बात की चिंता है कि क्या उनके नागरिकों को समय पर अदालत में पेश किया गया और क्या उन्हें उनकी भाषा में आरोपों की जानकारी दी गई. इसके अलावा, दुभाषिए और कांसुलर पहुंच को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं.
एनआईए का दावा
NIA ने अदालत को बताया है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने म्यांमार में सशस्त्र समूहों को कई बार प्रशिक्षण दिया. साथ ही, उन्होंने भारत के रास्ते यूरोप से ड्रोन और अन्य उपकरणों की तस्करी भी की. हालांकि, अभी तक इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई ठोस सबूत साझा नहीं किया गया है.
इस मामले ने मिजोरम के जरिए चल रहे एक बड़े नेटवर्क की ओर भी इशारा किया है. पहले भी राज्य सरकार ने कहा था कि बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक यहां आए और बिना जानकारी के आगे बढ़ गए. ऐसे में यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.


