जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का हल्लाबोल, क्या हैं CJP समर्थकों की मांगें?

जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थकों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा पारदर्शिता और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. आंदोलन में छात्रों की मानसिक सेहत, डिजिटल शिक्षा, जवाबदेही और मणिपुर की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी आवाज उठाई गई.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थकों ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया. पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके के नेतृत्व में आयोजित इस विरोध कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और युवा शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी, NEET पेपर लीक मामले और CBSE मूल्यांकन प्रणाली से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की.

अभिजीत दिपके ने क्या कहा?  

प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दिपके ने कहा कि उनकी मुहिम पिछले एक महीने से लगातार चल रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी मांगों को अनदेखा किया जा रहा है और सोशल मीडिया पर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि पोस्ट हटाने या अकाउंट ब्लॉक करने से आंदोलन खत्म नहीं होगा, क्योंकि यह छात्रों और अभिभावकों की वास्तविक चिंताओं से जुड़ा हुआ है.

आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. उनका आरोप है कि कई छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और इस पर जवाबदेही तय किए बिना शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल नहीं हो सकता.

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग पर भी अपनी राय रखी. कुछ अभिभावकों का कहना था कि डिजिटलीकरण जरूरी है, लेकिन इसे लागू करने से पहले शिक्षकों और संबंधित कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए. उनका मानना है कि तकनीक का उपयोग तभी प्रभावी होगा जब उसके संचालन की व्यवस्था मजबूत हो.

प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता भी आंदोलन का प्रमुख मुद्दा रही. कई प्रतिभागियों ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से छात्रों का मनोबल टूटता है और वर्षों की मेहनत पर सवाल खड़े हो जाते हैं. उन्होंने मांग की कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जाए.

मणिपुर में शिक्षा व्यवस्था सामान्य करने की मांग

इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने मणिपुर में शिक्षा व्यवस्था को सामान्य करने की मांग भी उठाई. उनका कहना था कि लंबे समय से जारी अस्थिरता के कारण वहां के छात्र प्रभावित हो रहे हैं और स्कूल-कॉलेजों का संचालन सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा है.

आंदोलन में छात्रों की मानसिक सेहत और जवाबदेही का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा. वक्ताओं ने कहा कि परीक्षा संबंधी विवादों और अनिश्चितताओं के कारण बड़ी संख्या में छात्र मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं. ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और छात्रों को उचित सहायता उपलब्ध कराना समय की जरूरत है.

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