नीट पेपर लीक मामले पर दिल्ली के पूर्व CM केजरीवाल की आई प्रतिक्रिया, घटना को बताया राजनीतिक मिलीभगत
चार बार नीट का पेपर लीक हो चुका है, लेकिन अभी तक पेपर लीक कराने वाले किसी आरोपी को सजा नहीं मिली है। पिछली बार जिन्होंने पेपर लीक किया, वो भी जमानत पर बाहर हैं।

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी ने पेपर लीक होने के बाद नीट की परीक्षा रद्द करने पर केंद्र सरकार को आड़े हाथ लिया है। ‘‘आप’’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि राजनीतिक मिलीभगत और संरक्षण के चलते नीट के पेपर लीक हो रहे हैं। इससे पहले 2017, 2021 और फिर 2024 में भी नीट का पेपर लीक हुआ था और अब फिर लीक हो गया।
चार बार नीट का पेपर लीक हो चुका है, लेकिन अभी तक पेपर लीक कराने वाले किसी आरोपी को सजा नहीं मिली है। पिछली बार जिन्होंने पेपर लीक किया, वो भी जमानत पर बाहर हैं। उन्होंने कहा कि सालों तक तैयारी करने वाले करोड़ों युवाओं के साथ ये बहुत बड़ा धोखा है। अब युवाओं को सड़कों पर उतरना पड़ेगा। आम आदमी पार्टी उनके साथ खड़ी है।
पेपर लीक मामले पर भड़के केजरीवाल
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नीट परीक्षा रद्द होने से प्रभावित लाखों बच्चों और उनके पेरेंट्स के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि मैंने भी अपनी जिंदगी में पहले आईआईटी का पेपर दिया था और फिर सिविल सर्विस का पेपर दिया था। मैं जानता हूं कि इसके लिए किस तरह से कठोर तपस्या करनी पड़ती है। हिसार में हमारा एक छोटा सा घर होता था, वहां ऊपर हमने एक छोटा सा कमरा बनवा लिया था। 24 घंटे उस कमरे में बैठकर मैं तैयारी करता रहता था। सौभाग्य से उन दिनों में पेपर लीक नहीं हुआ करते थे।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कई परिवार बहुत गरीब होते हैं और कोचिंग बहुत महंगी है। कोचिंग करने के लिए कई लोग दिल्ली आकर रुकते हैं और बच्चे किराए पर जगह लेते हैं। कई बच्चों के मां-बाप उन्हें कोचिंग कराने के लिए अपना सोना गिरवी रख देते हैं या जमीन बेच देते हैं। उसके बाद अगर पेपर लीक हो जाए, तो इससे बड़ा धोखा कुछ और नहीं हो सकता। यह नीट का पेपर पहली बार लीक नहीं हुआ है। इससे पहले 2017, 2021 और फिर 2024 में भी नीट का पेपर लीक हुआ था और अब लीक हुआ है। चार बार नीट का पेपर लीक हो चुका है।
मिलीभगत और राजनीतिक संरक्षण
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पेपर ऐसे लीक नहीं होते हैं। इसका मतलब है कि बहुत बड़े स्तर पर कुछ ना कुछ मिलीभगत और राजनीतिक संरक्षण है। मैं यह जानना चाहता हूं कि जिन्होंने 2017 का पेपर लीक किया था, वे आज कहां हैं? क्या उनको सजा मिली? जिन्होंने 2021 का पेपर लीक किया था, क्या उनको सजा मिली? जिन्होंने 2024 का पेपर लीक किया, उन सबकी बेल हो गई और वे सारे बाहर हैं। सबको कह दिया गया है कि अब अगले पेपर को लीक करने की तैयारी करो और वे कर रहे हैं। पेपर लीक पर लीक हो रहे हैं, आखिर इस देश के अंदर यह चल क्या रहा है?
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कहता हूं कि सरकार चलाना कोई आसान काम नहीं है, सरकार चलाना बहुत मुश्किल काम है। जिन लोगों से बिना लीक करवाए एक पेपर ठीक से नहीं होता, वे सरकार क्या चलाएंगे? ये लोग मिले हुए हैं। यह पूरी तरह से मिलीभगत का मामला है। लाखों-करोड़ों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन सब बच्चों के साथ मेरी संवेदनाएं हैं और मैं उन सब बच्चों को बोलना चाहता हूं कि सड़कों पर उतरना पड़ेगा। यह सरकार केवल और केवल जन आंदोलन की भाषा समझती है और केजरीवाल बच्चों के साथ है।
सौरभ भारद्वाज ने जताई आपत्ति
AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हर दूसरे वर्ष यह सुनने में आता है कि नीट का एग्जाम, जो एमबीबीएस के लिए एंट्रेंस एग्जाम होता है, उसमें बार-बार पेपर लीक हो रहे हैं। इस परीक्षा के जरिए देश की पूरी की पूरी क्रीम का एडमिशन होता है। यह पेपर लीक होना कोई आसान काम नहीं है। इसका अंदेशा है कि राजनीतिक तौर पर कुछ गिरोहों को संरक्षण मिला हुआ है जो इस पेपर को लीक करते हैं।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आज पूरी दुनिया में हिंदुस्तान की साख इसलिए है क्योंकि यहां के डॉक्टर यूरोप, अमेरिका में बड़े-बड़े अस्पतालों को लीड करते हैं। हिंदुस्तान के इंजीनियर बड़ी-बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी के अंदर सीईओ और सीटीओ के पदों पर हैं। अगर भारत की शिक्षा व्यवस्था के ऊपर प्रश्न चिन्ह लग जाएगा, तो हमारे डॉक्टरों और इंजीनियरों की जो कदर है, वह पूरी दुनिया में खत्म हो जाएगी। इससे पूरी दुनिया में यह संदेश चला जाएगा कि भारत के अंदर किसी भी तरीके के लोग डॉक्टर और इंजीनियर बन रहे हैं।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सरकार बार-बार आश्वासन देती है, मगर इसके बावजूद पेपर लीक हो रहे हैं। मां-बाप अपना पेट काटकर और लाखों रुपए खर्च करके बच्चों को कोचिंग कराते हैं। आज देश के हर राज्य के अंदर अलग-अलग कोचिंग सेंटर और शहर बने हुए हैं जहां लाखों बच्चे तैयारी कर रहे हैं। पेपर लीक होने से उन परिवारों के लाखों रुपए डूब गए और वे बच्चे बर्बाद हो गए। इसके कारण कितने ही बच्चे डिप्रेशन में चले जाएंगे, लेकिन सरकार इस विषय पर गंभीर नहीं दिखती है।


