इलेक्टोरल बॉन्ड खत्म होने के बाद ट्रस्ट से BJP की तिजोरी लबालब! 3577 करोड़ की हुई बौछार
सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को रद्द किए जाने के बाद विपक्ष को लगा कि भाजपा की फंडिंग पर बुरा असर पड़ेगा, लेकिन ऐसा इसका उल्टा हुआ है. बीजेपी को इस साल रिकॉर्ड तोड़ चंदा मिला.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2024 में इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया था. कई लोग सोच रहे थे कि इससे भाजपा की फंडिंग पर बुरा असर पड़ेगा, लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं हुआ. 2024-25 में भाजपा को इलेक्टोरल ट्रस्टों से रिकॉर्ड तोड़ ₹3,577 करोड़ से ज्यादा का चंदा मिला है. यह पिछले साल की तुलना में काफी बढ़ोतरी है.
ट्रस्टों से भाजपा को भारी फायदा
चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुल ₹4,276 करोड़ के चंदे में से भाजपा को 83.6% हिस्सा मिला. कॉर्पोरेट डोनर्स अब बॉन्ड की जगह इलेक्टोरल ट्रस्ट का रास्ता चुन रहे हैं, क्योंकि इससे पार्टी को दिए चंदे का ब्योरा छिप जाता है. सबसे बड़ा ट्रस्ट 'प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट' रहा, जिसने भाजपा को ₹2,180 करोड़ दिए.
'प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट' ने ₹757 करोड़ और 'ए बी जनरल इलेक्टोरल ट्रस्ट' ने ₹460 करोड़ का योगदान दिया. अन्य ट्रस्टों जैसे न्यू डेमोक्रेटिक, हार्मोनी और ट्रायम्फ ने भी करोड़ों रुपये भाजपा को दिए.
अन्य पार्टियों की स्थिति
कांग्रेस को ट्रस्टों से कुल ₹313 करोड़ मिले, जो कुल चंदे का सिर्फ 7.3% है. तृणमूल कांग्रेस को 3.6% यानी करीब ₹153 करोड़ मिले. अन्य पार्टियां जैसे टीडीपी, वाईएसआर कांग्रेस, आप और बीजेडी को भी कुछ हिस्सा मिला, लेकिन भाजपा सबसे आगे रही. पिछले साल बॉन्ड से भाजपा को ₹1,686 करोड़ मिले थे. बॉन्ड खत्म होने के बाद ट्रस्टों से मिलने वाला चंदा चार गुना से ज्यादा बढ़ गया. कांग्रेस को बॉन्ड से पहले ₹828 करोड़ मिलते थे, जो अब घटकर काफी कम हो गए.
चंदे का दूसरा रास्ता
ट्रस्टों के अलावा पार्टियों को व्यक्तियों, कंपनियों और संस्थाओं से सीधा चंदा भी मिलता है. आमतौर पर यह ट्रस्टों से ज्यादा होता है. फिर भी, ट्रस्ट रूट कॉर्पोरेट डोनर्स के लिए गोपनीयता बनाए रखने का अच्छा विकल्प बन गया है. यह बदलाव दिखाता है कि राजनीतिक फंडिंग का तरीका बदला है, लेकिन भाजपा सत्ता में होने के कारण सबसे बड़ा लाभार्थी बनी हुई है.


