किश्तवाड़ में लापता लोगों के परिजनों का उमर अब्दुल्ला पर फूटा गुस्सा, सीएम ने कहा- 'मैं उनका गुस्सा समझ सकता हूं'

किश्तवाड़ जिले में जारी राहत और बचाव कार्यों का निरीक्षण करने पहुंचे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का सामना वहां मौजूद लोगों की गहरी नाराज़गी से हुआ. लापता लोगों के रिश्तेदारों ने सीएम के सामने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं और जवाब की मांग की.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

जम्मू संभाग के किश्तवाड़ जिले के चिशौटी इलाके में जारी राहत और बचाव कार्यों का निरीक्षण करने पहुंचे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का सामना वहां मौजूद लोगों की गहरी नाराज़गी से हुआ. लापता लोगों के रिश्तेदारों ने सीएम के सामने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं और जवाब की मांग की. रिश्तेदारों ने कहा कि वे जानना चाहते हैं कि उनके परिवार के सदस्य ज़िंदा मिलेंगे या नहीं.

उमर अब्दुल्ला ने शांति बनाए रखने की अपील की 

सीएम ने उन्हें पास लगे एक अस्थायी तंबू (टैंट) में बुलाकर शांति बनाए रखने का प्रयास किया और आश्वासन दिया कि बचाव कार्य जल्द सम्पन्न हो जाए. लेकिन कुछ लोग भावनाओं के असर में वहां बैठने से इंकार करते रहे. इस कारण वह वहां से वापस चले गए.

मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा कि मुझे उनका गुस्सा समझ आता है. वे दो दिन से अपने लापता प्राणियों की तलाश में हैं और उन्हें सटीक जानकारी चाहिए. यदि कोई जीवित नहीं है, तो कम से कम शव तो उन्हें वापस मिल जाना चाहिए, ताकि वे अंतिम संस्कार कर सकें.

राहत कार्यों की व्यापक रूपरेखा की साझा

उन्होंने राहत कार्यों की व्यापक रूपरेखा भी साझा की. एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन सभी प्रमुख इकाईयों ने बचाव अभियान में हिस्सा लिया है. जहां लोगों को बचाना संभव नहीं हो रहा है, वहां मलबे से शव निकालकर परिवारों को सौंपने का प्रयास जारी है.

दुर्घटना में मृतकों की संख्या लगभग 60 बताई गई है, जबकि 70 से 80 लोग अभी भी लापता हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि यह संख्या कुछ उतार-चढ़ाव के साथ बदल सकती है, लेकिन यह 500 या 1,000 तक नहीं पहुंचने वाली है. उनका कहना था कि राहत अभियान अभी बचाव का स्वरूप ले रहा है. मुख्य फोकस है फंसे लोगों को निकालना, उसके बाद शवों की निकासी प्राथमिकता होगी.

उमर अब्दुल्ला आज सुबह चिशौटी पहुंचे. यह गांव किश्तवाड़ जिले में मचैल माता यात्रा मार्ग पर आखिरी मोटर-चालक गांव है. उन्होंने सेना, प्रशासन और अन्य एजेंसियों से स्थान पर ही वर्चुअल रियलिटी (VR) हेडसेट की मदद से प्रभावित इलाके का डिजिटली सर्वेक्षण भी किया. साथ ही, प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनके दर्द और मांगा हुए राहत सामान की जानकारी ली.

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