यमुनानगर में मिड डे मील पर संकट, राशन नहीं पहुंचा तो शिक्षक अपने पैसों से बच्चों को खिला रहे खाना

यमुनानगर के सरकारी स्कूलों में पिछले एक महीने से मिड डे मील का राशन नहीं पहुंचा है. इससे हजारों बच्चों के दोपहर के भोजन पर संकट गहरा गया है. स्कूल प्रशासन और अभिभावक लगातार सप्लाई शुरू कराने की मांग कर रहे हैं.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

यमुनानगर: हरियाणा सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाला मिड डे मील अब व्यवस्था की लापरवाही का शिकार होता नजर आ रहा है. जिले के कई राजकीय स्कूलों में राशन खत्म होने के कारण मिड डे मील वर्कर्स और शिक्षक बाजार से खुद सामान खरीदकर बच्चों का भोजन तैयार कराने को मजबूर हैं. बच्चों का खाना बंद न हो, इसलिए स्कूल प्रबंधन अपने स्तर पर इंतजाम कर रहा है, लेकिन इससे शिक्षकों और वर्कर्स पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है.

स्थिति यह है कि कई स्कूलों में गेहूं, चावल, दाल, दलिया, तेल और मसालों का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है. समय पर सप्लाई नहीं मिलने से स्कूलों में मिड डे मील योजना प्रभावित हो रही है. शिक्षक संगठनों और मिड डे मील वर्कर्स यूनियन ने इस व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए जल्द समाधान की मांग की है.

इतने हजार बच्चों के भोजन पर पड़ा असर

जिले के 592 प्राथमिक और 213 माध्यमिक स्कूलों में मिड डे मील तैयार किया जाता है. इन स्कूलों में करीब 62 हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं. इनमें लगभग 32 हजार बच्चे प्राथमिक, 28 हजार माध्यमिक और करीब दो हजार बच्चे बाल वाटिका-3 में शामिल हैं. स्कूलों में बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए गेहूं और चावल की आपूर्ति एफसीआई के जरिए होती है, जबकि दाल, दलिया, तेल, मसाले और अन्य खाद्य सामग्री हरियाणा एग्रो उपलब्ध कराता है.

समय पर सप्लाई नहीं पहुंचने से बढ़ी परेशानी

मिड डे मील वर्कर्स यूनियन और शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि एफसीआई और हरियाणा एग्रो की ओर से समय पर राशन नहीं पहुंच रहा है. आमतौर पर स्कूलों को दो से तीन महीने का राशन एक साथ दिया जाता है, लेकिन इस बार कई स्कूलों में करीब एक महीने से नई सप्लाई नहीं पहुंची.

दो-तीन महीने पहले आया स्टॉक भी अब अधिकांश स्कूलों में खत्म हो चुका है. कई स्कूलों में भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के बावजूद अतिरिक्त राशन रखने की मजबूरी बनी रहती है, ताकि बच्चों के भोजन पर असर न पड़े.

बाजार से सामान खरीद रहे शिक्षक

प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रधान सुरेंद्र कांबोज ने बताया कि पहले शिक्षक स्वयं थोक बाजार से राशन खरीदते थे और गुणवत्ता जांचने के बाद ही सामग्री ली जाती थी. अब एजेंसियों के जरिए पहले से पैक राशन भेजा जाता है, जिसकी गुणवत्ता जांचना आसान नहीं होता.

उन्होंने कहा कि कई बार खराब सामग्री भी स्कूलों तक पहुंच चुकी है, जिसे बाद में बदलवाना पड़ा. फिलहाल कई स्कूलों में राशन खत्म होने के बाद शिक्षक अपने स्तर पर सामान खरीदकर मिड डे मील की व्यवस्था चला रहे हैं.

यूनियन ने उठाए सवाल

मिड डे मील यूनियन की राज्य सचिव शरबती ने कहा कि सरकारी स्कूलों में मिड डे मील योजना लगातार बदहाल होती जा रही है. कई स्कूलों में जरूरी खाद्य सामग्री खत्म होने से बच्चों के भोजन पर संकट खड़ा हो गया है. उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा और पोषण को लेकर बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर बच्चों के लिए राशन तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा. ऐसे में मिड डे मील वर्कर्स और शिक्षक अपनी जेब से खर्च कर भोजन तैयार कराने को मजबूर हैं.

विभाग ने जल्द सप्लाई का दिया भरोसा

यमुनानगर के मौलिक शिक्षा अधिकारी अशोक राणा ने कहा कि स्कूलों में मिड डे मील राशन की मांग भेजी जा चुकी है. एजेंसी अधिकारियों से भी बातचीत हो चुकी है और जल्द ही स्कूलों में राशन की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी.

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