'उपदेश नहीं, विफलता के प्रमाण', PM मोदी के वर्क फ्रॉम होम अपील पर राहुल गांधी ने की टिप्पणी

वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन बचाने और विदेशी मुद्रा संरक्षण के लिए अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करने की अपील की है. इसी विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पीएम की एस अपील पर कड़ी टिप्पणी की हैं.

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Edited By: JBT Desk

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और उससे पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन बचाने और विदेशी मुद्रा संरक्षण के लिए अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करने की अपील की है. हालांकि, प्रधानमंत्री की इस अपील को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है और इसे सरकार की नाकामी बताते हुए कड़ी टिप्पणी की है. 

पीएम मोदी ने क्या कहा 

हैदराबाद में कई विकास परियोजनाओं के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में देशहित को सबसे ऊपर रखना जरूरी है. उन्होंने लोगों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने और जरूरत पड़ने पर कारपूलिंग अपनाने की सलाह दी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अगर संभव हो तो लोग एक बार फिर घर से काम करने की व्यवस्था अपनाएं, जैसा कोविड-19 महामारी के दौरान किया गया था.

सोना न खरीदने की सलाह

मोदी ने विदेशी मुद्रा बचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अगले एक वर्ष तक विदेश यात्राओं को टालने की कोशिश करें. इसके साथ ही उन्होंने नागरिको से सोना न खरीदने पर जोर दिया. बता दें, इस अपील के पीछे की वजह बताते हुए उनका कहना था कि वैश्विक संकट के दौर में हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में सहयोग करे.

राहुल गांधी ने की टिप्पणी 

बता दें, प्रधानमंत्री की यह अपील ऐसे समय में की है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है. खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के चलते तेल आपूर्ति और आयात लागत को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. इसी बीच कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. 

बात दें, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जनता से त्याग की अपील करना सरकार की विफलता को दर्शाता है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हर संकट की जिम्मेदारी आम लोगों पर डाल देती है, जबकि उसे खुद जवाबदेही निभानी चाहिए.
 

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