India-Pakistan War: पहलाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच युद्ध के कयास लगाए जा रहे हैं. भारत की कड़ी रणनीतियों और पाकिस्तान की हरकतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है. इस बीच, कुछ विशेषज्ञों ने दोनों देशों के बीच संभावित युद्ध पर अपनी राय दी है और यह समझाया है कि युद्ध के लिए सही समय और रणनीति चुनना कितना महत्वपूर्ण है.
पूर्व भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया, जो 2017 से 2020 तक पाकिस्तान में भारतीय मिशन का हिस्सा रहे थे, ने युद्ध के लिए सही समय चुनने पर ज़ोर दिया. उनके अनुसार, "युद्ध का समय जनता के मूड पर निर्भर नहीं होना चाहिए. यह पूरी तरह से रणनीतिक होना चाहिए और इसे गति, चौंकाने वाली रणनीति और गोपनीयता पर आधारित करना चाहिए." उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध को रणनीतिक रूप से समय पर अंजाम देना बेहद अहम होता है, और यह निर्णय पूरी तरह से राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर आधारित होना चाहिए.
सामरिक मामलों के विशेषज्ञ सुशांत सरीन ने भी युद्ध की स्थिति पर गंभीर चेतावनी दी है. उनका कहना है कि अगर भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे पर मिसाइलें फेंकने लगते हैं, तो दोनों देशों के लिए यह विनाशकारी हो सकता है. सरीन के मुताबिक, "हमें यह समझना होगा कि मिसाइलों के युद्ध से दोनों देशों की सुरक्षा पर भारी असर पड़ेगा. अगर इस्लामाबाद और लाहौर पर मिसाइलें गिरीं, तो दिल्ली भी असुरक्षित हो सकती है." उनका यह भी कहना है कि इस तरह की स्थिति से पूरी दुनिया प्रभावित हो सकती है, और इसके परिणाम पूरी दुनिया को झेलने पड़ सकते हैं.
इसी बीच, सुशांत सरीन ने भारत और रूस के रिश्तों पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि हम हमेशा रूस को अपना दोस्त मानते हैं, लेकिन अगर पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध हुआ तो क्या रूस हमारा साथ देगा? खासकर जब रूस का सबसे बड़ा सहयोगी चीन, भारत के खिलाफ खड़ा हो सकता है. यह सवाल इस समय बेहद अहम हो गया है, क्योंकि भारत के सामरिक मोर्चे पर रूस का समर्थन महत्वपूर्ण माना जाता है, और युद्ध की स्थिति में यह देखना होगा कि रूस भारत के पक्ष में खड़ा होता है या नहीं.
सुशांत सरीन ने भारत सरकार द्वारा पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल्स पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का समर्थन किया. उन्होंने कहा, "इन चैनलों के जरिए पाकिस्तान भारत के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहा था और वे भारतीय दर्शकों के जरिए बड़ी रकम कमा रहे थे. इन चैनलों का काम सिर्फ भारत को नीचा दिखाना और झूठ फैलाना था, जो देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकता है."
भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव बढ़ते जा रहे हैं, और युद्ध की आशंका से दोनों देशों की जनता चिंतित है. युद्ध को रोकने के लिए तात्कालिक कदम उठाना जरूरी है, लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, राष्ट्रीय एकता और मजबूत रणनीतिक फैसले लेने की आवश्यकता है.
अब सवाल यह उठता है कि क्या दोनों देशों के बीच कूटनीति से स्थिति को संभाला जा सकेगा या यह तनाव और बढ़ेगा? आगे क्या होगा, ये तो वक्त ही बताएगा, लेकिन सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों के मुताबिक, युद्ध की स्थिति में भारी नुकसान हो सकता है. First Updated : Monday, 05 May 2025