होर्मुज संकट पर एक्शन मोड में भारत, वैश्विक बैठक में रखा मजबूत पक्ष

होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की नाकाबंदी के बीच भारत ने ब्रिटेन के शिखर सम्मेलन में भाग लेकर समुद्री मार्ग को सुरक्षित और सुचारु रखने पर जोर दिया. भारत के लिए यह मुद्दा बेहद अहम है, क्योंकि देश के तेल आयात का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर उसके प्रभाव के बीच भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सक्रिय भूमिका दिखाई है. गुरुवार को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ब्रिटेन की पहल पर आयोजित एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन में देश का प्रतिनिधित्व किया. इस बैठक में करीब 30 देशों ने हिस्सा लिया, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान द्वारा आंशिक रूप से अवरुद्ध किए गए होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करना था. यह जलमार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है.

विक्रम मिसरी ने क्या कहा? 

ब्रिटेन ने इस सम्मेलन को इसलिए बुलाया ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने के उपायों पर विचार किया जा सके. भारत को भी इस चर्चा में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था. बैठक के दौरान विक्रम मिसरी ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा और निर्बाध व्यापार को लेकर भारत की स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने यह रेखांकित किया कि ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाए रखना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है.

इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि भारत लगातार ईरान और क्षेत्र के अन्य देशों के संपर्क में बना हुआ है, ताकि भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित और निर्बाध मार्ग सुनिश्चित किया जा सके. उन्होंने कहा कि एलपीजी, एलएनजी और अन्य आवश्यक वस्तुओं को लेकर जाने वाले जहाजों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है.

जायसवाल के अनुसार, हाल के दिनों में किए गए कूटनीतिक प्रयासों का सकारात्मक असर भी देखने को मिला है. अब तक छह भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं. भारत इस मुद्दे पर संबंधित देशों के साथ निरंतर संवाद बनाए हुए है, ताकि आगे भी किसी तरह की बाधा न आए.

इस बीच, ब्रिटेन द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में अमेरिका की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है. बताया जा रहा है कि अमेरिका के शामिल होने की संभावना कम है, जबकि अन्य देश राजनयिक और राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं.

होर्मुज से तेल का कितना परिवहन होता है?

गौरतलब है कि ईरान ने अमेरिका और इज़राइल के साथ चल रहे तनाव के बीच इस जलमार्ग को आंशिक रूप से बाधित किया है. इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई है. होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है.

भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि देश अपनी लगभग 88 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है. इसमें से एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है, जो इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है. अनुमान है कि भारत के कुल तेल आयात का 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर करता है, जिससे इसकी सुरक्षा भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाती है.

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