भारत ने अमेरिकी सेना के पूर्व कर्नल के भारतीय बंदरगाहों से ईरान पर हमले का दावा किया खारिज
ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी युद्ध छठे दिन भी जारी है, जिसमें दोनों पक्षों के हमलों से भारी जनहानि हुई है और क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है. इस बीच अमेरिकी पूर्व कर्नल के भारतीय बंदरगाहों के इस्तेमाल वाले दावे को भारत सरकार ने पूरी तरह फर्जी बताते हुए सख्त खंडन किया है.

ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी सैन्य संघर्ष के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया. अमेरिकी सेना के पूर्व कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि अमेरिका की नौसेना ईरान पर हमले करने के लिए भारतीय बंदरगाहों का इस्तेमाल कर रही है. उनका कहना था कि अमेरिकी नौसैनिक अड्डों को नुकसान पहुंचने के बाद अमेरिका को वैकल्पिक ठिकानों पर निर्भर होना पड़ रहा है. अब भारत सरकार ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है.
भारत के विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस मामले में तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि यह दावा पूरी तरह निराधार और भ्रामक है. मंत्रालय की फैक्ट चेक यूनिट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि भारत इस संघर्ष में किसी भी पक्ष के साथ शामिल नहीं है और न ही उसकी जमीन या बंदरगाहों का इस्तेमाल किसी सैन्य कार्रवाई के लिए किया जा रहा है. सरकार ने लोगों से अपील की कि इस तरह की अपुष्ट और भ्रामक खबरों पर विश्वास न करें.
Fake News Alert!
— MEA FactCheck (@MEAFactCheck) March 4, 2026
Claims being made on OAN, a US based channel that Indian ports are being used by the US Navy are fake and false. We caution you against such baseless and fabricated comments. pic.twitter.com/xiFWnkoXBk
मैकग्रेगर के बयान के बाद सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से फैल गया और कई जगहों पर भारत की संभावित भूमिका को लेकर चर्चा शुरू हो गई. हालांकि भारतीय अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में साफ कर दिया कि देश की नीति इस संघर्ष से दूरी बनाए रखने की है.
तुर्की का दावा
उधर युद्ध के मैदान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. रिपोर्टों के अनुसार अब तक ईरान में एक हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान में 70 से ज्यादा और इजराइल में करीब एक दर्जन लोगों के मारे जाने की खबर है. ईरान ने बहरीन, कुवैत और इजराइल की दिशा में मिसाइल हमले किए हैं. वहीं, तुर्की ने दावा किया कि ईरान की एक बैलिस्टिक मिसाइल उसके हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही नाटो की रक्षा प्रणाली द्वारा रोक दी गई.
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सेना के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि सैन्य कार्रवाई योजना के अनुसार आगे बढ़ रही है. अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन नेताओं ने युद्ध रोकने के प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया है.
इस संघर्ष का असर वैश्विक स्तर पर भी दिखाई देने लगा है. मध्य पूर्व में जहाजरानी और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो रही है. इसके अलावा क्षेत्र के कई हवाई अड्डों पर उड़ानें प्रभावित होने से लाखों यात्री अलग-अलग देशों में फंसे हुए हैं.


