भारत-अमेरिका के बीच 4 दिवसीय ट्रेड डील बैठक शुरू, ओमान के साथ FTA आज से लागू

भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित अंतरिम व्यापार समझौते के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए चार दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक शुरू हो रही है.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

नई दिल्ली: वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर सोमवार का दिन भारत के लिए बेहद अहम साबित होने जा रहा है. एक तरफ जहां भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित अंतरिम व्यापार समझौते के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए चार दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक शुरू हो रही है. वहीं दूसरी तरफ भारत और ओमान के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भी आज से प्रभावी हो जाएगा. दोनों देश सोमवार को ही इस ऐतिहासिक फैसले का औपचारिक एलान करेंगे.

चार दिन तक चलेगी भारत-अमेरिका की बैठक

नई दिल्ली में सोमवार से शुरू हो रही इस चार दिवसीय बैठक में दोनों देशों के मुख्य वार्ताकार आमने-सामने होंगे. अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उनके मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच कर रहे हैं. जबकि भारतीय पक्ष की कमान वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव और मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन के हाथों में है.

बैठक का मुख्य उद्देश्य

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य फरवरी में तय हुई अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देना है. वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक दोनों देश न केवल इस अंतरिम समझौते के ब्योरे को फाइनल करेंगे बल्कि एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के तहत बाजार पहुंच, गैर-शुल्क उपायों, सीमा शुल्क, व्यापार सुविधा, निवेश प्रोत्साहन और आर्थिक सुरक्षा जैसे गंभीर क्षेत्रों पर भी बातचीत को आगे बढ़ाएंगे.

फरवरी में बनी थी रूपरेखा

बता दें कि भारत और अमेरिका ने बीते 7 फरवरी को एक संयुक्त बयान जारी कर इस पारस्परिक रूप से लाभकारी अंतरिम समझौते की रूपरेखा पर सहमति जताई थी. इस रूपरेखा के तहत अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने का वादा किया था. रूसी तेल खरीदने के कारण भारतीय सामानों पर लगाए गए 25 प्रतिशत शुल्क को भी हटाने की बात थी. जिसे समझौते के तहत घटाकर 18 प्रतिशत किया जाना था.

नया शुल्क लगाने की घोषणा

20 फरवरी को अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक जवाबी शुल्क के खिलाफ फैसला सुना दिया. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने 24 फरवरी से अगले 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत का नया शुल्क लगाने की घोषणा कर दी. अमेरिकी नीतियों में आए इस बड़े बदलाव के कारण फरवरी में होने वाली वार्ता टल गई थी. अगले चार दिनों तक चलने वाली यह बैठक दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को एक नई दिशा दे सकती है.

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