कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने हाल ही में एक विवादित बयान दिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. उन्होंने पाकिस्तान की नीतियों को बेनकाब करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भेजे गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को आतंकवादियों से जोड़कर आलोचना की. इस पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे "घृणित तुलना" करार दिया और संसद में कांग्रेस नेता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई.
एक इंटरव्यू में रमेश ने कहा कि पहलगाम हमलों के आरोपी आतंकवादी चार हमलों में शामिल थे, फिर भी वे आज़ादी से घूम रहे हैं. वहीं हमारे सांसद भी विभिन्न जगह घूम रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि आतंकवादियों की पकड़ क्यों नहीं हो रही, जबकि सरकार केवल कांग्रेस पार्टी को निशाना बना रही है. रमेश ने कहा कि भाजपा का हमला कांग्रेस पर होता है जबकि असली हमला आतंकवादियों पर होना चाहिए. पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और आतंकियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए.
रमेश ने आगे कहा कि 2014 से देश में एक तरह का "अघोषित आपातकाल" लागू है. उन्होंने सरकार की आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ मनाने की योजना पर सवाल उठाते हुए इसे ध्यान भटकाने की चाल बताया. साथ ही, उन्होंने आरएसएस की भूमिका को भी सार्वजनिक रूप से उजागर करने की बात कही.
भाजपा ने रमेश की इस तुलना की तीव्र निंदा की है. भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि रमेश ने संसद में पाकिस्तान को बेनकाब करने वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की तुलना आतंकवादियों से करके न केवल सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को कमजोर करने की कोशिश की है, बल्कि भारत की कूटनीतिक पहल को भी कम आंका है. उन्होंने संसद से मांग की कि इस तरह की टिप्पणी करने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो.
भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने भी रमेश पर केंद्र सरकार के कूटनीतिक आउटरीच कार्यक्रम को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि कांग्रेस, खासकर राहुल गांधी की पार्टी, पाकिस्तान के पक्ष में बयानबाजी कर रही है.
इस विवाद के बीच, कांग्रेस के ही एक अन्य नेता उदित राज ने अपने सहयोगी शशि थरूर की एक टिप्पणी पर तीखा कटाक्ष किया. थरूर ने कहा था कि भारत ने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक में पहली बार नियंत्रण रेखा (एलओसी) का उल्लंघन किया था, जिसे उदित राज ने कांग्रेस के स्वर्णिम इतिहास के अपमान के रूप में देखा. उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने 1965 और 1971 में भी पाकिस्तान में सैन्य कार्रवाई की थी और यूपीए सरकार के दौरान भी कई सर्जिकल स्ट्राइक हुईं.
इसके अलावा, राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी ऑपरेशन सिंदूर को "छुटपुट युद्ध" करार दिया था, जो सरकार के कड़े कदम के विरोध में था. First Updated : Thursday, 29 May 2025