जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री अराघची को लगाया फोन, तनाव के बीच तीसरी बातचीत, जानिए क्या निकला नतीजा?

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से वेस्ट एशिया के बढ़ते तनाव पर गहन वार्ता की. भारत ने साफ कहा कि इस क्षेत्र में शांति स्थापित करना, वहां मौजूद भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकताएं हैं.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार शाम ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से टेलीफोन पर विस्तृत बातचीत की. यह 28 फरवरी के बाद दोनों नेताओं की तीसरी बातचीत है, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे, जिसके जवाब में क्षेत्र में कई देशों पर प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई हुई. दोनों मंत्रियों ने चल रहे संघर्ष के नवीनतम घटनाक्रम पर गहन चर्चा की और संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई.

जयशंकर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आज शाम ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ चल रहे झगड़े के बारे में लेटेस्ट डेवलपमेंट पर डिटेल में बातचीत हुई. हम टच में रहने पर सहमत हुए. इस बातचीत से पहले दोनों नेताओं के बीच 28 फरवरी और 5 मार्च को भी संपर्क हुआ था. भारत अब क्षेत्रीय संकट, खासकर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभावों से निपटने के लिए विभिन्न देशों के साथ डिप्लोमैटिक प्रयास तेज कर रहा है.

जयशंकर की जर्मनी और दक्षिण कोरिया से बात

मंगलवार को जयशंकर ने जर्मन और दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रियों से भी बात की. इन चर्चाओं में पश्चिम एशिया के हालात और ऊर्जा सप्लाई पर पड़ने वाले असर को प्रमुखता से उठाया गया. नई दिल्ली संकट के दौरान ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रही है.

संसद में जयशंकर का बयान 

सोमवार को संसद में जयशंकर ने कहा था कि कोशिशें तो हुई हैं, लेकिन इस वक्त लीडरशिप लेवल पर ईरान के साथ कॉन्टैक्ट करना साफ तौर पर मुश्किल है. उन्होंने आगे कहा कि वेस्ट एशिया में लड़ाई के दौरान ईरान में लीडरशिप लेवल पर भी कई लोग मारे गए हैं. जयशंकर ने सरकार के तीन बड़े मैसेज भी साझा किए. दिल्ली शांति और बातचीत पर लौटने के पक्ष में है, इंडियन डायस्पोरा की सुरक्षा प्राथमिकता है और एनर्जी सिक्योरिटी सबसे ऊपर होगी.

राज्यसभा में दिए गए बयान में जयशंकर ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से करीब 67,000 भारतीय नागरिक प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित वापस लौट आए हैं. ईरानी पक्ष ने 28 फरवरी को इस इलाके में 'तीन जहाजों' को भारतीय बंदरगाहों पर डॉक करने की इजाजत मांगी थी, जिसे 1 मार्च को मंजूरी दे दी गई थी.

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