रांची: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है. बता दें, इस बार तीन उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें इंडिया गठबंधन की ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के बैजनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा शामिल हैं, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी को एनडीए का समर्थन प्राप्त है. वहीं मतदान से पहले सभी दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं.
विधानसभा में वर्तमान संख्या बल के आधार पर इंडिया गठबंधन मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है. बता दें, 81 सदस्यीय सदन में महागठबंधन के पास 56 विधायकों का समर्थन है, जिसमें जेएमएम, कांग्रेस, राजद और वाम दलों के विधायक शामिल हैं. वहीं, भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 24 विधायक हैं. राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 वोटों की आवश्यकता होती है, ऐसे में गणित के हिसाब से महागठबंधन दोनों सीटों पर जीत दर्ज कर सकता है.
हालांकि मुकाबला उतना आसान नहीं माना जा रहा है. एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी को जीत के लिए अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर क्रॉस वोटिंग होती है तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं. यही वजह है कि दोनों पक्ष अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने में जुटे हुए हैं.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विश्वास जताया है कि इंडिया गठबंधन दोनों सीटों पर जीत हासिल करेगा. उनका दावा है कि गठबंधन को निर्धारित संख्या से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त है. दूसरी ओर, परिमल नथवानी और भाजपा नेताओं ने भी जीत का भरोसा जताया है. भाजपा का कहना है कि कुछ विधायक अपनी अंतरात्मा और राजनीतिक सोच के आधार पर मतदान कर सकते हैं.
झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग का इतिहास रहा है, इसलिए इस बार भी सभी की नजरें मतदान पर टिकी हैं. बैजनाथ राम की जीत को लेकर महागठबंधन अपेक्षाकृत आश्वस्त दिखाई देता है, जबकि दूसरी सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और परिमल नथवानी के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है. अब अंतिम फैसला मतदान और मतों की गणना के बाद ही सामने आएगा, जिससे यह स्पष्ट होगा कि संख्या बल भारी पड़ा है या फिर सियासी रणनीति. First Updated : Thursday, 18 June 2026