कश्मीर की अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को यूएपीए मामले में आजीवन कारावास की सजा

दिल्ली की अदालत ने आसिया अंद्राबी को UAPA के तहत आजीवन कारावास और उनकी दो सहयोगियों को 30-30 साल की सजा सुनाई. अदालत ने इन सभी को आतंकी संगठन से जुड़ी गतिविधियों और देश विरोधी मामलों में दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा जरूरी बताई.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत दर्ज मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदरजीत सिंह ने सजा पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया. अदालत ने इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर अपराध मानते हुए कड़ी सजा देने की जरूरत बताई.

सोफी फेहमीदा और नाहिदा नसरीन भी दोषी 

इसी मामले में सह-आरोपी सोफी फेहमीदा और नाहिदा नसरीन को भी दोषी ठहराया गया और उन्हें 30-30 साल की सजा सुनाई गई. अदालत ने कहा कि दोनों ने भी गैरकानूनी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसके चलते उन्हें कठोर दंड दिया जाना उचित है.

इससे पहले 14 जनवरी को अदालत ने तीनों आरोपियों को UAPA की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार दिया था. इनमें धारा 20 (आतंकी संगठन की सदस्यता), धारा 38 (आतंकी संगठन से संबंध) और धारा 39 (आतंकी संगठन को समर्थन) शामिल हैं. अदालत ने पाया कि इन धाराओं के तहत उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं.

इसके अलावा, तीनों को भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराओं में भी दोषी ठहराया गया. इन आरोपों में अलग-अलग समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाना, देश की एकता और अखंडता के खिलाफ बयान देना, आपराधिक साजिश रचना और राज्य विरोधी गतिविधियों में शामिल होना शामिल है.

अंद्राबी के लिए अधिकतम दंड की मांग

सजा के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अदालत से अंद्राबी के लिए अधिकतम दंड की मांग की. एजेंसी ने दलील दी कि उनके कार्य देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसे हैं और ऐसे मामलों में सख्त सजा देकर समाज में स्पष्ट संदेश देना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके.

आसिया अंद्राबी जम्मू-कश्मीर की जानी-मानी अलगाववादी नेता हैं और वह दुख्तरान-ए-मिल्लत नामक संगठन की संस्थापक हैं. यह संगठन कश्मीर को भारत से अलग कर पाकिस्तान में शामिल करने की वकालत करता रहा है. अंद्राबी अपने कट्टरपंथी विचारों और शरिया कानून के समर्थन के लिए भी चर्चा में रही हैं.

उन पर पहले भी कई बार देशद्रोह और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के आरोप लगे हैं. वर्ष 2018 में NIA ने उन्हें आतंक से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से यह मामला अदालत में लंबित था और अब इसमें अंतिम फैसला सुनाया गया है.

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