Kejriwal और आतिशी के प्रचार अभियान में बच्चों की भागीदारी पर हंगामा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मंत्री आतिशी के चुनाव प्रचार में बच्चों की भागीदारी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने एक वीडियो पर सवाल उठाते हुए बच्चों के इस्तेमाल को 'दिशानिर्देशों के उल्लंघन' बताया. चुनावी प्रचार में बच्चों की भागीदारी को नैतिक और कानूनी नजरिए से गलत ठहराया जा रहा है. एनएचआरसी की कार्रवाई से केजरीवाल सरकार पर दबाव बढ़ सकता है.

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

नई दिल्ली. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ( एनएचआरसी ) ने एक वीडियो का स्वत: संज्ञान लिया है जिसमें कथित तौर पर बच्चों को आम आदमी पार्टी ( आप ) के लिए प्रचार करते हुए दिखाया गया है. आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल और दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किए गए. इस वीडियो पर एनएचआरसी सदस्य प्रियांक कानूनगो ने तत्काल कार्रवाई की मांग की है.

कानूनगो ने इसे "आपत्तिजनक" बताया 

'एक्स' को वीडियो हटाने का निर्देश देते हुए कानूनगो ने इसे "आपत्तिजनक" बताया और इसके कानूनी और चुनावी मानदंडों के कथित उल्लंघन को उजागर किया. एक्स रेजिडेंट शिकायत अधिकारी विनय प्रकाश को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि यह प्रथा न केवल 5 फरवरी, 2024 को भारत के चुनाव आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करती है, बल्कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 के साथ-साथ अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों का भी उल्लंघन करती है.

बच्चों की भागीदारी को लेकर बहुत चिंतित

एनएचआरसी सदस्य ने चुनाव आयुक्त राजीव कुमार से भी संपर्क किया और उनसे राजनीतिक दलों को दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया. चिंता व्यक्त करते हुए कानूनगो ने कहा कि 'एक्स' पर साझा की गई सामग्री में बच्चों को सीधे राजनीतिक अभियानों में भाग लेते हुए दिखाया गया है. उन्होंने कहा कि आयोग राजनीतिक प्रचार गतिविधियों में बच्चों की भागीदारी को लेकर बहुत चिंतित है.

आदर्श आचार संहिता अभी लागू नहीं हुई

एनएचआरसी ने माना कि आगामी दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए आदर्श आचार संहिता अभी लागू नहीं हुई है, लेकिन तत्काल हस्तक्षेप की मांग की. कानूनगो ने कहा कि आयोग का दृढ़ मत है कि उपरोक्त पोस्ट/पुनः पोस्ट को तत्काल हटाया जाना चाहिए/हटाया जाना चाहिए और इस मुद्दे को हल करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण देते हुए एक कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) सात दिनों के भीतर आयोग को प्रस्तुत की जानी चाहिए.

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