राज्यसभा सीट पर पार्थ की नजर...बारामती में शरद पवार ने अजित पवार के बेटों के साथ ही अहम बैठक, जानें क्या हुई बातचीत ?
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार के निधन के बाद राज्य में राजनीति हलचल तेज हो गई है. इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद पवार ने अजित पवार के दोनों बेटों के साथ बारामती में अहम बैठक की है. सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में पार्थ पवार की राज्यसभा सीट की महत्वकांक्षा पर चर्चा हुई. हालांकि, औपचारिक रूप से इस मुलाकात में दिवंगत नेता के स्मारक से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई.

मुंबई : महाराष्ट्र के कद्दावर नेता और पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार के असामयिक निधन ने राज्य की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है, जिसके बाद अब समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं. इसी कड़ी में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के संस्थापक शरद पवार ने अजित पवार के बेटों जय पवार और पार्थ पवार के साथ बारामती में मुलाकात की. जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई. औपचारिक रूप से यह बैठक दिवंगत नेता के स्मारक निर्माण पर केंद्रित थी, लेकिन जानकारों का मानना है कि इसके पीछे पार्थ पवार की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं छिपी हो सकती हैं.
राज्यसभा सीट पर पार्थ पवार की नजर
जल्द महाराष्ट्र में खाली होगी राज्यसभा की 7 सीटें
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पार्थ की नजरें अप्रैल 2026 पर टिकी हैं, जब महाराष्ट्र से राज्यसभा की सात सीटें खाली होने वाली हैं. दिलचस्प बात यह है कि इन सात सीटों में से एक सीट खुद शरद पवार की भी है. राजनीतिक चर्चा यह है कि क्या पार्थ अपने दादा की इसी विरासत वाली सीट के जरिए संसद पहुंचना चाहते हैं.
क्या है राज्यसभा चुनाव का गणित ?
महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 37 विधायकों के समर्थन (कोटा) की आवश्यकता होती है. यदि 2026 के चुनावी गणित को देखें, तो सत्तारूढ़ गठबंधन (महायुति) बेहद मजबूत स्थिति में नजर आता है. बीजेपी के 135, शिवसेना के 57 और एनसीपी के अपने 41 विधायकों के साथ यह गठबंधन आसानी से कई सीटें जीतने का दम रखता है. एनसीपी के पास मौजूद 41 विधायकों की संख्या पार्थ पवार जैसे उम्मीदवार को बिना किसी बाहरी मदद के सीधे राज्यसभा भेजने के लिए पर्याप्त है.
क्या शरद पवार अपने पोते को आशीर्वाद देंगे
अब महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे बड़ा सस्पेंस इस बात को लेकर है कि क्या शरद पवार अपने पोते पार्थ पवार को अपनी सीट के लिए आशीर्वाद देंगे. यह केवल एक सीट का सवाल नहीं है, बल्कि 'पवार विरासत' के भविष्य और परिवार के दोनों गुटों के बीच के रिश्तों की नई दिशा तय करने वाला मोड़ साबित हो सकता है. क्या आने वाले समय में पवार परिवार फिर से एकजुट होकर राजनीतिक चुनौतियों का सामना करेगा या विरासत की यह खींचतान कोई नया मोड़ लेगी, इस पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हैं.


