'दोबारा हिम्मत नहीं', NEET विवाद के बीच मध्य प्रदेश की छात्रा ने दी जान, सुसाइड नोट वायरल
मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है. बता दें, डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली 18 वर्षीय आकांक्षा चतुर्वेदी ने नीट विवाद के चलते अपनी जान दे दी है.

भोपाल: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है. बता दें, डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली 18 वर्षीय आकांक्षा चतुर्वेदी ने नीट विवाद के चलते अपनी जान दे दी है. इस बीच परिवार ने भी आरोप लगाया है कि NEET परीक्षा से जुड़ा तनाव और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंता ने उनकी बेटी को इतना तोड़ दिया कि उसने अपनी जिंदगी खत्म करने जैसा बड़ा कदम उठा लिया.
कर्ज लेकर भेजा कोचिंग
बता दें, आकांक्षा हनुमना क्षेत्र के मगनिया गांव की रहने वाली थी और वह बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थी. वहीं अपने इस सपने को पूरा करने के लिए आकांक्षा महाराष्ट्र के नागपुर में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी. इस दौरान उसकी पढ़ाई के लिए परिवार ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी और किसान पिता ने कर्ज लेकर बेटी की कोचिंग और रहने का खर्च उठाया, ताकि उसका सपना पूरा हो सके.
लेकिन 20 मई को वह सपना हमेशा के लिए टूट गया और नागपुर में अपने कमरे में आकांक्षा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. इस खबर ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है. बेटी को खोने का दर्द अभी कम भी नहीं हुआ था कि उसका लिखा आखिरी पत्र सामने आ गया, जिसे पढ़कर हर किसी की आंखें नम हो गई है.
दोबारा NEET देने की हिम्मत नहीं
अपने सुसाइड नोट में आकांक्षा ने माता-पिता से माफी मांगी है. उसने लिखा कि उसके माता-पिता को उस पर भरोसा था कि वह डॉक्टर बनेगी, लेकिन अब उसमें दोबारा NEET परीक्षा देने की हिम्मत नहीं बची है. उसने यह भी लिखा कि पहली परीक्षा में उसके अच्छे नंबर आए थे, लेकिन उसे डर था कि अगली बार वह वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाएगी, जिसके चलते उसने ये खौफनाक कदम उठाया. वहीं अब आकांक्षा का ये सुसाइड नोट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है.
छात्रों पर पड़ रहा मानसिक दबाव
बता दें, यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब NEET परीक्षा को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है. पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने का फैसला लिया गया है. ऐसे माहौल में आकांक्षा की मौत ने छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और प्रतियोगी परीक्षाओं के तनाव को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है. वहीं घटना के बाद कई नेताओं और छात्र संगठनों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीरता से ध्यान देने की मांग की है.


