नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में मतदाता सूची को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आशंका जताई है कि विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआइआर) की प्रक्रिया के दौरान राज्य में करीब 1.20 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं. अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को जारी होनी है, ऐसे में इस मुद्दे ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है.
कोलकाता के भवानीपुर स्थित अपने निर्वाचन क्षेत्र में विभिन्न परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास के बाद ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि वैध मतदाताओं के नाम तार्किक विसंगतियों के नाम पर हटाए जा रहे हैं और इसके पीछे राजनीतिक दबाव हो सकता है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि एसआइआर के कारण बड़ी संख्या में लोगों का मताधिकार प्रभावित हुआ है. उन्होंने कहा, 'एसआइआर के कारण बहुतों ने मताधिकार खो दिया है. पहले चरण के बाद 58 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए थे. तार्किक विसंगतियों के नाम पर 14 फरवरी तक कम से कम 20 लाख और वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं. करीब एक करोड़ 20 लाख नाम हटाए जा सकते हैं.'
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर एक राजनीतिक दल के इशारे पर कार्रवाई करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि वैध मतदाताओं के नाम हटाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है.
उन्होंने स्पष्ट कहा, 'मैं एक भी वैध मतदाता का नाम हटाए जाने के खिलाफ आवाज उठाती रहूंगी. चुनाव आयोग के खिलाफ मैंने खुद सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई की.'
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद चुनाव आयोग वाट्सएप के माध्यम से नए निर्देश जारी कर रहा है और अपनी प्रक्रिया में बदलाव नहीं कर रहा.
अपने निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर में जैन मनस्तंभ और संत कुटिया गुरुद्वारा गेट समेत कई विकास परियोजनाओं के उद्घाटन व शिलान्यास के बाद उन्होंने यह बयान दिया.
ममता बनर्जी ने कहा, 'बंगाल में हम सभी भाषाओं, धर्मों, रीति-रिवाजों, संस्कृति और खान-पान का सम्मान करते हैं. मुझे बिहार की रोटी, चपाती, लिट्टी, गुजरात का ढोकला व अन्य व्यंजन पसंद हैं.' First Updated : Thursday, 26 February 2026