महबूबा मुफ्ती को घर में किया गया नजरबंद! बेटी इल्तिजा ने वीडियो शेयर करते हुए किया बड़ा दावा, सरकार को घेरा

श्रीनगर में पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को कथित तौर पर नजरबंद किए जाने का दावा उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने सोशल मीडिया पर किया है. इल्तिजा मुफ्ती ने रविवार को अपने एक्स अकाउंट से पोस्ट करते हुए ये दावा.

Shraddha Mishra

श्रीनगर: पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने दावा किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री को उनके श्रीनगर स्थित घर में नजरबंद कर दिया गया है. इल्तिजा मुफ्ती ने रविवार को अपने एक्स अकाउंट से पोस्ट करते हुए लिखा कि शहीद दिवस की पूर्व संध्या पर हमें नजरबंद कर दिया गया है. इसकी वजह सिर्फ J&K पुलिस ही बेहतर जानती है. इल्तिजा मुफ्ती ने इसके साथ ही एक वीडियो भी साझा किया. बता दें कि जम्मू-कश्मीर में हर साल 13 जुलाई को वर्ष 1931 में डोगरा सेना की गोलीबारी में श्रीनगर की केंद्रीय जेल के बाहर मारे गए 22 लोगों की याद में शहीद दिवस मनाया जाता है. 

एक्स पर शेयर किया वीडियो

इल्तिजा ने अपने एक्स पर इससे जुड़ा एक वीडियो साझा किया जिसमें दिखाई दे रहा है कि कुछ पुलिसकर्मी महबूबा मुफ्ती के घर के बाहर खड़े है. इस दौरान एक महिला भी घर की तरफ जाती हुई दिखाई दे रही है, जो पुलिसवालों से बात कर रही है. इसके साथ ही महबूबा मुफ्ती के घर के बाहर एक सफेद रंग की स्कॉर्पियो भी दिखाई दी. 

इल्तिजा ने लगाए आरोप 

वीडियो साझा करते हुए इल्तिजा ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया कि क्या यही वह 'सामान्य स्थिति' है जिसके कश्मीर में बहाल होने का दावा किया जाता है? इसमें कोई शक नहीं कि स्थानीय सरकार भी पुलिस के साथ मिलकर सिधरा में घर तोड़ने और अपनी सुविधानुसार विरोधियों को हिरासत में लेने का काम कर रही है. 

13 जुलाई का इतिहास

जम्मू-कश्मीर में 13 जुलाई का दिन लंबे समय से राजनीतिक और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है. वर्ष 1931 में इसी दिन श्रीनगर की केंद्रीय जेल के बाहर प्रदर्शन के दौरान 22 लोगों की मौत हुई थी. घाटी की कई राजनीतिक पार्टियां उन्हें शहीद मानते हुए हर साल श्रद्धांजलि अर्पित करती रही हैं. कई वर्षों तक इस अवसर पर सरकारी स्तर पर कार्यक्रम आयोजित होते थे और प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता शहीदों की मजार पर जाकर श्रद्धांजलि देते थे. यह दिन जम्मू-कश्मीर में आधिकारिक अवकाश के रूप में भी मनाया जाता था.

अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद इस दिन से जुड़ी सरकारी परंपराओं में बड़ा बदलाव आया. प्रशासन ने 13 जुलाई की सरकारी छुट्टी समाप्त कर दी और आधिकारिक कार्यक्रम भी बंद कर दिए. इसके बाद से सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए राजनीतिक नेताओं के शहीद स्मारक तक जाने और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करने पर कई बार प्रतिबंध लगाए गए हैं. ऐसे में इल्तिजा मुफ्ती का यह दावा भी उसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो