बंगाल की खाड़ी में छिपा है अरबों का तेल-गैस खजाना? भारत सरकार ने शुरू किया बड़ा सर्वे

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति पर असर के बीच भारत ने बड़ा ऊर्जा अभियान शुरू करने की तैयारी कर ली है. समुद्र की गहराई में छिपे संभावित तेल और गैस भंडारों को खोजने के लिए विशाल सर्वे किया जाएगा.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान की सख्त निगरानी के बाद दुनिया भर में तेल और गैस आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है. इसका असर भारत पर भी साफ दिखाई देने लगा है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. इसी बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए समुद्र के नीचे छिपे तेल और प्राकृतिक गैस के भंडारों की खोज के लिए विशाल सर्वे अभियान शुरू करने का फैसला किया है.

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत सरकार का हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (DGH) बंगाल की खाड़ी और पूर्वी तट के कई समुद्री क्षेत्रों में बड़े स्तर पर भूगर्भीय सर्वेक्षण कराने जा रहा है. इस अभियान का उद्देश्य समुद्र के भीतर छिपे संभावित तेल और गैस भंडारों का पता लगाना है, ताकि भविष्य में भारत की आयात पर निर्भरता कम की जा सके.

समुद्र के नीचे होगा बड़ा वैज्ञानिक सर्वे

इस परियोजना को तकनीकी भाषा में “2D ब्रॉडबैंड मरीन सीस्मिक एंड ग्रेविटी-मैग्नेटिक डेटा एक्विजिशन, प्रोसेसिंग एंड इंटरप्रिटेशन” कहा जा रहा है. आसान शब्दों में समझें तो यह समुद्र के नीचे मौजूद संरचनाओं का हाई-टेक स्कैन होगा. इसके तहत विशेष सर्वे जहाज समुद्र में लंबे केबलनुमा उपकरण खींचेंगे, जिन्हें स्ट्रीमर्स कहा जाता है. ये उपकरण समुद्र के नीचे ध्वनि तरंगें भेजेंगे.

जब ये तरंगें चट्टानों और विभिन्न परतों से टकराकर वापस लौटेंगी, तो वैज्ञानिक उनके आधार पर समुद्र तल के नीचे की विस्तृत तस्वीर तैयार करेंगे. इस तकनीक की मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि समुद्र के नीचे किन जगहों पर तेल और प्राकृतिक गैस के भंडार मौजूद हो सकते हैं.

लाखों किलोमीटर क्षेत्र में चलेगा अभियान

सरकार का यह प्रोजेक्ट काफी बड़े स्तर पर चलाया जाएगा और इसे पूरा होने में लगभग दो साल का समय लग सकता है. योजना के मुताबिक, बंगाल-पूर्णिया और महानदी बेसिन क्षेत्र में करीब 45 हजार लाइन किलोमीटर तक सर्वे किया जाएगा. इसके अलावाअंडमान बेसिन में 43 हजार लाइन किलोमीटर, कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन में 43 हजार लाइन किलोमीटर और कावेरी बेसिन में लगभग 30 हजार लाइन किलोमीटर क्षेत्र में सर्वे की योजना है.

भारत के लिए क्यों जरूरी है यह कदम?

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है. गैस के मामले में भी देश काफी हद तक बाहरी सप्लाई पर निर्भर है. ऐसे में जब भी मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता है या वैश्विक स्तर पर आपूर्ति प्रभावित होती है, तो उसका असर सीधे भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर पड़ता है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का पूर्वी समुद्री तट अभी भी ऊर्जा संसाधनों के मामले में पूरी तरह खोजा नहीं गया है. आधुनिक तकनीक की मदद से अगर यहां बड़े भंडार मिलते हैं, तो इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है.

इन 5 क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा उम्मीद

1. बंगाल अपतटीय बेसिन: वैज्ञानिकों का मानना है कि इस क्षेत्र में मोटी तलछटी परतों के नीचे बड़े हाइड्रोकार्बन स्रोत हो सकते हैं. यहां पहले भी गैस के संकेत मिलने की बात सामने आ चुकी है.

2. महानदी बेसिन: इस क्षेत्र को व्यावसायिक उत्पादन के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, यहां गहरे समुद्र में गैस और बायोगैस सिस्टम मौजूद हो सकते हैं.

3. अंडमान बेसिन: भूगर्भीय संरचना के आधार पर इसे काफी संभावनाओं वाला क्षेत्र माना जा रहा है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यहां विशाल गैस भंडार और मीथेन जमा हो सकते हैं, जिन्हें भविष्य की ऊर्जा का बड़ा स्रोत माना जाता है.

4. कृष्णा-गोदावरी बेसिन: यह क्षेत्र पहले से भारत का प्रमुख गैस उत्पादक इलाका है. हालांकि नए सर्वे से उम्मीद जताई जा रही है कि इसके गहरे हिस्सों में अभी भी कई बड़े भंडार छिपे हो सकते हैं.

5. कावेरी बेसिन: विशेषज्ञों का कहना है कि यहां के गहरे समुद्री हिस्सों में अभी भी काफी संभावनाएं मौजूद हैं. भविष्य में यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की तैयारी

सरकार का यह कदम सिर्फ नए तेल और गैस भंडार खोजने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद भारत को भविष्य में वैश्विक ऊर्जा संकटों से बेहतर तरीके से बचाना भी है. अगर इस अभियान में बड़े भंडार मिलते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता कम हो सकती है और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है.

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