सरकार के साथ तीसरी वार्ता से पहले CJP का बड़ा बयान, कहा- इस्तीफा नहीं मिला तो बातचीत का कोई फायदा नहीं
केंद्र सरकार और CJP के बीच तीसरे दौर की बातचीत से पहले NEET विवाद को लेकर टकराव बढ़ गया है. CJP ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि अगर इस्तीफा नहीं आया तो बातचीत का कोई मतलब नहीं.

नई दिल्ली: केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच होने वाली तीसरे दौर की बातचीत से पहले दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ता नजर आ रहा है. CJP ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है. पार्टी का कहना है कि अगर सरकार इस मांग को स्वीकार नहीं करती है तो आगे की बातचीत का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा.
CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने शनिवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पार्टी की सबसे अहम और गैर-परक्राम्य मांग है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार इस मांग को खारिज करती है, तो बातचीत को आगे बढ़ाने का कोई मतलब नहीं होगा.
Dharmendra Pradhan’s resignation is NON-NEGOTIABLE.
If it’s a no from the government, there’s no point of further discussion.— Ashutosh Ranka (@AshutoshRanka) July 25, 2026
केंद्र और CJP के बीच आज तीसरे दौर की वार्ता
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार दोपहर संविधान क्लब में CJP के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत का दूसरा दौर किया था. बैठक करीब दो घंटे तक चली थी. इस दौरान प्रदर्शनकारियों की मांगों और परीक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्रियों ने CJP प्रतिनिधिमंडल को बताया था कि सरकार आंतरिक चर्चा के बाद शनिवार दोपहर फिर से उनसे मुलाकात करेगी. इसी के तहत आज बातचीत का तीसरा दौर होने जा रहा है. हालांकि, वार्ता से पहले CJP ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर अपना रुख और कड़ा कर लिया है.
CJP ने सरकार के सामने रखी हैं तीन प्रमुख मांगें
CJP की ओर से सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखी गई हैं. पहली मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है. दूसरी मांग प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं करने की गारंटी से जुड़ी है. तीसरी मांग उन छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की है, जिन्होंने NEET परीक्षा के पेपर लीक विवाद के बाद कथित तौर पर आत्महत्या की. पार्टी का कहना है कि इन परिवारों को आर्थिक मदद देने के साथ-साथ पूरे मामले में जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए.
दो मांगों पर सरकार ने दिखाई सैद्धांतिक सहमति
शुक्रवार को हुई बातचीत में केंद्र सरकार ने CJP की दो प्रमुख मांगों पर सैद्धांतिक रूप से सहमति जताई थी. इनमें प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने और पेपर लीक विवाद से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग शामिल है. हालांकि, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का मुद्दा अब भी दोनों पक्षों के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है. CJP का कहना है कि इस मांग पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता.
जेपी नड्डा ने बैठक के बाद क्या कहा?
शुक्रवार की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बताया था कि बातचीत करीब दो घंटे तक चली. उन्होंने कहा कि CJP प्रतिनिधिमंडल ने तीन प्रमुख मांगों के साथ परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए पांच सुझाव भी सरकार के सामने रखे. नड्डा के मुताबिक, सरकार ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि इन मुद्दों पर आंतरिक स्तर पर चर्चा की जाएगी और शनिवार दोपहर फिर से बैठक कर सरकार की ओर से आगे की जानकारी दी जाएगी.
सरकारी सूत्रों ने इस्तीफे की संभावना से किया इनकार
CJP नेता लगातार कह रहे हैं कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी मांगों में सबसे ऊपर है. दूसरी ओर, सरकारी सूत्रों ने इस मांग को स्वीकार किए जाने की संभावना से इनकार किया है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार का मानना है कि किसी मंत्री का इस्तीफा देना सबसे आसान रास्ता हो सकता है, लेकिन फिलहाल सरकार धर्मेंद्र प्रधान के साथ खड़ी है. एक सरकारी सूत्र ने कहा कि जनता ने सरकार को जनादेश दिया है और सरकार अपने काम को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है.
पेपर लीक रोकने के लिए सरकार ने उठाए कई कदम
इस विवाद के बीच केंद्र सरकार ने पेपर लीक की समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठाने की घोषणा की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए त्वरित अदालतें स्थापित करने की बात कही है. इसके अलावा, सरकार परीक्षा और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों के लीक होने से जुड़े कानूनों में बदलाव करने की तैयारी में है. प्रस्तावित बदलावों के तहत ऐसे मामलों में कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया जा सकता है.
NTA में भी बड़े बदलाव की शुरुआत
सरकार ने शिक्षा मंत्रालय के स्तर पर भी बदलाव किए हैं. शिक्षा सचिव को बदला गया है. इसके अलावा, परीक्षा आयोजित करने वाली राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी NTA के 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं. सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार का भरोसा भी दिया है. इन बदलावों का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है.
CJP ने कहा- केवल अधिकारियों पर कार्रवाई काफी नहीं
NTA के 47 अधिकारियों को हटाए जाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि यह कदम पर्याप्त नहीं है. उनका कहना है कि पूरे मामले की कई स्तरों पर जांच होनी चाहिए और अंतिम जिम्मेदारी तय की जानी जरूरी है. रांका ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री परीक्षा व्यवस्था और पेपर लीक से जुड़े मामलों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं. उन्होंने कहा कि अधिकारियों पर कार्रवाई के बावजूद पार्टी अपनी मुख्य मांग से पीछे नहीं हटेगी और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जारी रहेगी.


