अब जमीनी हकीकत के हिसाब से बनेंगी योजनाएं, मोदी सरकार का नया खाका तैयार

भारत सरकार स्थानीय जरूरतों के मुताबिक कौशल विकास योजनाएं तैयार कर रही है ताकि स्किल गैप को पाटा जा सके. इसके लिए जिलेवार अध्ययन पूरा हो चुका है और अब 2015 की कौशल विकास नीति में संशोधन की तैयारी है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

Modi government's draft: भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में स्थानीय कारोबार और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सबसे बड़ी बाधा स्किल गैप (कौशल की कमी) को पाटने पर जोर दिया जा रहा है. इसी उद्देश्य से सरकार स्थानीय स्तर पर कौशल मांग और उपलब्धता का अध्ययन कर योजनाओं को उसी के अनुसार तैयार करने की पहल कर रही है. कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय का मानना है कि अब केंद्रीय योजनाओं को राज्यों और जिलों की ज़रूरतों के अनुरूप ढालने का समय आ गया है.

रिपोर्ट से खुली तस्वीर

मंत्रालय ने सभी राज्यों का जिलेवार अध्ययन कर लिया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि किस इलाके में किस प्रकार के कुशल पेशेवरों की अधिक आवश्यकता है और वहां मौजूदा स्किल गैप कितना बड़ा है. इस दिशा में एक रिपोर्ट हाल ही में कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने जारी की. रिपोर्ट में प्रत्येक राज्य की जिला कौशल विकास योजनाओं का संकलन किया गया है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जिला और राज्य स्तर पर बनी योजनाएं अब राष्ट्रीय योजनाओं से सीधे जुड़ें, ताकि रोजगार और स्वरोजगार दोनों में नई संभावनाएं खुलें और उद्योगों को प्रशिक्षित श्रमबल आसानी से उपलब्ध हो सके.

सरकार की प्राथमिकता

केंद्र सरकार की मंशा है कि राष्ट्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता नीति 2015 में संशोधन कर इसे अधिक विकेंद्रीकृत और व्यावहारिक बनाया जाए. इसके तहत केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और जिला प्रशासन के बीच तालमेल को और मज़बूत करने की तैयारी है. सरकार चाहती है कि स्थानीय प्रशासन न सिर्फ कौशल विकास योजनाओं को अपनाए, बल्कि उन्हें बड़े राष्ट्रीय मिशनों जैसे मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, हरित भारत मिशन, दलहन आत्मनिर्भरता मिशन, परमाणु ऊर्जा मिशन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के साथ जोड़े. ऐसा करने से कौशल विकास सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि देश की आर्थिक वृद्धि का आधार बन सकेगा.

रिपोर्ट में सुझाए गए कदम

रिपोर्ट में कई अहम सिफारिशें की गई हैं. सबसे पहले, डीएसडीपी के निर्माण की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की आधिकारिक भूमिका का हिस्सा बनाई जाए. इसके लिए हर जिले में समर्पित योजना इकाइयों की स्थापना की जानी चाहिए, जो जिला कौशल समितियों के साथ मिलकर कार्य करें. इन इकाइयों में प्रशिक्षित पेशेवर हों और इन्हें पर्याप्त तकनीकी व वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएं.

साथ ही, योजना की पारदर्शिता और स्थिरता बनाए रखने के लिए निगरानी और मूल्यांकन का एक मजबूत ढांचा खड़ा करने की जरूरत बताई गई है. इससे योजनाओं का असर मापा जा सकेगा और समय-समय पर उनमें आवश्यक सुधार किए जा सकेंगे.

सरकार का मानना है कि जब जिलों की वास्तविक स्किल मांग और कमी की तस्वीर स्पष्ट होगी, तभी एक ठोस रोडमैप तैयार किया जा सकेगा. इससे न केवल बेरोजगारी घटेगी, बल्कि उद्योगों और कारोबारों के लिए भी प्रशिक्षित मानव संसाधन की समस्या कम होगी, जो आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती प्रदान करेगा.

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