पूर्णिया से निर्दलीय सांसद Pappu Yadav ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि देश की राजनीति में महिलाओं का सफर बेहद कठिन और समझौतों से भरा हुआ है। उन्होंने कहा कि बिना किसी प्रभावशाली संपर्क के राजनीति में आगे बढ़ना लगभग असंभव है। उनके अनुसार, सामाजिक और राजनीतिक ढांचे में महिलाओं की स्थिति अभी भी कमजोर है। इस बयान ने तुरंत विवाद को जन्म दे दिया। कई लोगों ने इसे आपत्तिजनक और असंवेदनशील बताया है। राजनीतिक गलियारों में इस बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
Pappu Yadav ने दावा किया कि “90% महिलाओं का राजनीतिक करियर नेताओं के प्रभावशाली दायरे से शुरू होता है।” उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता के गलियारों में शोषण की संस्कृति गहराई तक मौजूद है। उनके इस बयान ने राजनीतिक नैतिकता और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हालांकि, कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस बयान को सामान्यीकरण और गलत धारणा बताया है। महिला नेताओं ने भी इस टिप्पणी की कड़ी आलोचना की है।
सांसद ने नेताओं के आचरण पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में बैठे कई लोग महिलाओं को सम्मान की नजर से नहीं देखते। उन्होंने यहां तक सुझाव दिया कि जनप्रतिनिधियों के मोबाइल फोन की जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। उनके अनुसार डिजिटल रिकॉर्ड मिटाया नहीं जा सकता, इसलिए जांच संभव है। इस बयान को लेकर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर बहस तेज हो गई है। कई नेताओं ने इसे निजता का उल्लंघन बताया है।
Pappu Yadav ने केंद्र सरकार के महिला आरक्षण कानून को “दिखावा” बताया। उन्होंने कहा कि Nari Shakti Vandan Adhiniyam को देर से लाया गया और इसमें पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं के लिए अलग प्रावधान होने चाहिए। उनका कहना है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो इसका लाभ केवल संपन्न वर्ग तक सीमित रह जाएगा। उन्होंने जातिगत जनगणना की मांग भी उठाई और सरकार पर सवाल किए। इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
इस बयान के बाद Bihar State Women Commission ने स्वतः संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया है। आयोग ने सांसद से तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्यों न उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की जाए। आयोग ने बयान को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे मामला और भी संवेदनशील हो गया है।
इस बयान के बाद राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई नेताओं ने इसे महिलाओं का अपमान बताया है, जबकि कुछ ने इसे व्यक्तिगत राय कहकर बचाव किया है। सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर बहस छिड़ गई है। महिला अधिकार संगठनों ने सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह मुद्दा अब राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है।
Pappu Yadav का यह बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक रूप से और बड़ा विवाद खड़ा कर सकता है। महिला आयोग की कार्रवाई और राजनीतिक दबाव के बीच मामला गंभीर होता जा रहा है। अब सभी की नजर उनके जवाब और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी है। यह विवाद महिला राजनीति और सामाजिक न्याय पर नई बहस को जन्म दे रहा है। First Updated : Tuesday, 21 April 2026