संसद के मॉनसून सत्र के पहले ही दिन देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है. धनखड़ ने अपने इस्तीफे का कारण खराब स्वास्थ्य बताया है, लेकिन कांग्रेस समेत विपक्षी दल इस फैसले को लेकर सवाल उठा रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धनखड़ के इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं और कहा कि उन्हें देश की सेवा के कई अवसर प्राप्त हुए हैं. हालांकि विपक्ष इसे सामान्य इस्तीफा नहीं मान रहा और इसके पीछे गहरे कारण होने का दावा कर रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में पोस्ट करते हुए लिखा, "श्री जगदीप धनखड़ जी को भारत के उपराष्ट्रपति समेत विभिन्न भूमिकाओं में देश की सेवा करने के कई अवसर मिले हैं. उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं." यह बयान उस वक्त आया जब धनखड़ का अचानक इस्तीफा राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन चुका था.
सोमवार शाम को 74 वर्षीय जगदीप धनखड़ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने लिखा है, "स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता देने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के लिए मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से, संविधान के अनुच्छेद 67(क) के तहत, तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूं." राष्ट्रपति मुर्मु ने उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है और इसे गृह मंत्रालय को औपचारिक अधिसूचना के लिए भेजा गया है.
अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति बने धनखड़ का कार्यकाल अगस्त 2027 तक निर्धारित था. ऐसे में कार्यकाल के बीच में उनका इस्तीफा न सिर्फ अप्रत्याशित है बल्कि राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को भी हवा दे रहा है. मंगलवार सुबह राज्यसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता डिप्टी चेयरमैन हरिवंश ने की, क्योंकि धनखड़ न सिर्फ सत्र से अनुपस्थित रहे बल्कि अब उनके विदाई भाषण की संभावना भी नहीं के बराबर है.
धनखड़ के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा, "एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए श्री जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दिया है. उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है इसका सम्मान किया जाना चाहिए. लेकिन सच्चाई यह भी है कि इसके पीछे कुछ और गहरे कारण हैं." कांग्रेस ने यहां तक कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को खुद धनखड़ को मनाने की कोशिश करनी चाहिए थी ताकि वह अपने फैसले पर पुनर्विचार करें.
धनखड़ के इस्तीफे से कुछ घंटे पहले ही उन्हें संसद में वरिष्ठ नेताओं से बातचीत करते देखा गया था. ऐसे में विपक्ष का कहना है कि उन्होंने किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या के संकेत नहीं दिए थे और न ही इस्तीफे की कोई पूर्व सूचना थी. First Updated : Tuesday, 22 July 2025