विभाजन की स्याह परछाइयाँ: PM मोदी बोले, 1947 की ख़ूनी सरहद आज भी क्यों रुला देती है हिंदुस्तान को?

भारत ने ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ पर 1947 के विभाजन में विस्थापित और मारे गए लाखों लोगों के बलिदान को याद किया. प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और जे. पी. नड्डा ने एकता का आह्वान करते हुए विभाजन की पीड़ा और उससे मिली सीख पर जोर दिया.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

Partition Horrors Remembrance Day: भारत ने आज ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ मना रहा है, जो 1947 में देश के विभाजन के दौरान लाखों लोगों द्वारा झेली गई पीड़ा और बलिदानों की स्मृति को समर्पित है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर कहा कि यह इतिहास का अत्यंत दुखद अध्याय है, जब लाखों लोग अपने घर-बार छोड़ने को मजबूर हुए और सांप्रदायिक हिंसा में असंख्य लोगों की जान गई. उन्होंने कहा कि यह दिन उन लोगों के साहस और जज़्बे को नमन करने का भी है, जिन्होंने अकल्पनीय क्षति के बाद भी नए सिरे से जीवन की शुरुआत की.

मोदी ने लोगों से देश में सद्भाव और एकता को मज़बूत करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि कई प्रभावित लोगों ने कठिनाइयों के बावजूद उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं, जो राष्ट्र के लिए प्रेरणा है.

अमित शाह ने कांग्रेस पर लगाए आरोप 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस दिन को देश के लिए अविस्मरणीय बताया. उन्होंने कहा कि विभाजन के कारण हिंसा, शोषण और अत्याचार बढ़े तथा लाखों लोग विस्थापित हुए. शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसके फैसले ने देश के टुकड़े कर दिए और भारत माता के गौरव को ठेस पहुंचाई. उन्होंने विभाजन में मारे गए सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि देश इस दर्द को कभी नहीं भूलेगा.

जे. पी. नड्डा ने दिया राष्ट्रीय एकता का संदेश

भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने इस अवसर पर राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि 1947 का वह काला दिन हमें याद दिलाता है कि कैसे लाखों नागरिकों ने पलायन, अमानवीय यातनाएं और अपने घर-संपत्ति का नुकसान सहा. नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इस दिन को मनाने की परंपरा राष्ट्र निर्माण में एक महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने सभी नागरिकों से एकजुट होकर राष्ट्र विरोधी ताकतों का मुकाबला करने का संकल्प लेने की अपील की.

‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ 14 अगस्त को हर वर्ष मनाया जाता है. प्रधानमंत्री मोदी ने 2021 में इसकी घोषणा की थी, ताकि विभाजन के दौरान विस्थापित और मारे गए लोगों के संघर्षों और बलिदानों को याद रखा जा सके. 1947 में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता के साथ-साथ भारत का विभाजन हुआ, जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान एक मुस्लिम देश के रूप में अस्तित्व में आया. इस विभाजन में लगभग 2 करोड़ लोग प्रभावित हुए, जिनमें से लाखों को अपने पैतृक स्थान छोड़कर शरणार्थी बनना पड़ा, जबकि लाखों लोग सांप्रदायिक हिंसा में मारे गए.

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